सालभर में 7 हजार 920 लोगों को काट चुके कुत्ते देशी इलाज के फेर में दो जने गंवा चुके हैं जान

Bundi News - जिले में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ रहा है। नगर परिषद-पालिकाओं द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़ने का काम एक साल से नहीं...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:56 AM IST
Bundi News - rajasthan news dogs that have bitten 7 thousand 920 people in a year have lost two lives due to indigenous treatment
जिले में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ रहा है। नगर परिषद-पालिकाओं द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़ने का काम एक साल से नहीं चला। सालभर में जिले में 7 हजार 920 लोग डॉग बाइट के शिकार हुए हैं। शहर में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या गली-मोहल्लों में लगातार बढ़ रही है। इन पर लगाम लगाने का कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

लोग कुत्ते और स्नेक के काटने के बाद तुरंत अस्पताल की बजाय अंधविश्वास में भोपो-नीम हकीमों के पास जाकर देशी इलाज कराते, जिससे जान पर बन अाती है। तालेड़ा के अकतासा कस्बे में दो माह पहले पागल कुत्ते ने दो लोगों को काटा, देसी इलाज कराने से चक्कर में शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। उसी कुत्ते ने एक महिला को भी काटा था, लेकिन महिला ने अस्पताल में तुरंत इलाज कराया, वह स्वस्थ है। समय पर एंटीरेबिज के टीके लगाने पर जान बच सकती है। कुत्ता वफादार ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है। अगर यह आपको काट ले तो तुरंत उपचार कराएं, नहीं तो जान से हाथ भी धोना पड़ सकता है।

बूंदी. शहर में आवारा घूमते कुत्ते, जो उत्पात मचाते कर देते हैं हमला।

समय पर इलाज नहीं कराया तो इंसान पागल तक हो जाता है : डाॅ. कुशवाह

डॉ. सुनील कुशवाह ने बताया कि कुत्ते के काटने से इंसान को कई तरह की बीमारियां हो जाती है। इंसान पागल तक हो जाता है। तुरंत प्राथमिक उपचार मिलने से रोगों से बचा जा सकता है। कुत्ते के काटने के बाद स्किन पर उनके एक या दो दांतों के निशान दिखते हैं तो समझिए कि एहतियात बरतने की जरूरत है। ऐसे कई लोग दांतों के निशान को मामूली जख्म की तरह ट्रीट करते हैं, जो गलत है। रेबीज वायरस होता है। यदि यह किसी जानवर में फैला हो और वह जानवर हमें काट ले खासकर कुत्ता बिल्ली, बंदर तो हमें रेबीज हो सकता है। डॉग बाइट के बाद जख्म को 15 मिनट तक चलते पानी में धोते रहे, वहां पट्टी कतई न बांधे, पहला एंटी रेबीज इंजेक्शन 24 घंटे के भीतर लगना जरुरी। पास के अस्पताल में जाकर कम से कम तीन डोज लगवाए। पहले दिन, तीसरे दिन और सातवें दिन। अंधविश्वास में नहीं पड़कर अस्पताल में डॉग बाइट का पूरा इलाज कराए।


जिलेभर में एक साल में सबसे ज्यादा कुत्तों के काटने की घटना नैनवां उपखंड में हुई, जहां 2353 लोगों को कुत्तों ने काटा। कापरेन में 1801, तालेडा 1724, बूंदी में 1536, हिंडौली में 506 लोग डॉग बाइट के शिकार हुए। ये वे लोग हैं, जिन्हाेंने अस्पताल में जाकर समय पर इलाज कराया। गांवाें में कई लोग देसी इलाज के चक्कर में अस्पताल नहीं पहुंचे, उनकी संख्या ज्यादा है।


समाजसेविका शारदा नामा ने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों की वजह से गली मोहल्लों से निकलना मुश्किल हो रहा है। कुत्तों की संख्या सालभर से बढ़ रही है। नगर परिषद को अभियान चलाकर कुत्तों के पकड़कर अन्यत्र छोड़ना चाहिए। इनकी नसबंदी करवानी चाहिए, जिससे इनकी तादाद नहीं बढ़े। समाजसेवी माधवप्रसाद विजयवर्गीय ने बताया कि एक्ट कहता है कि भैंस, गाय, बकरी, बिल्ली, कुत्ता पालें तो नगर परिषद में इनका रजिस्ट्रेशन जरूर करवाएं। इससे जानवर पालने वालों की जवाबदेही और जिम्मेदारी तय होती है। वे नियम और कानून से बंध जाएंगे। शहर में एक भी पालतू जानवर को पालने का किसी ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। कई लोगों को तो इस कानून की जानकारी तक नहीं है।


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