गीता के 700 श्लोकों का पद्य भावानुवाद किया डॉ. वीसी जैन ने

Bundi News - धर्म-अध्यात्म की संस्कृति वाले देश में संस्कारों का बहुत महत्व है। जो संस्कार व्यक्ति को बचपन में माता-पिता,...

Feb 17, 2020, 07:40 AM IST
Bundi News - rajasthan news dr vc jain performed the verse of 700 verses of gita

धर्म-अध्यात्म की संस्कृति वाले देश में संस्कारों का बहुत महत्व है। जो संस्कार व्यक्ति को बचपन में माता-पिता, परिजन व गुरु से मिलते हैं, वही जीवनभर उसे प्रभावित करते हैं। गुरु के सानिध्य में जो शिक्षा मिलती थी, उसमें जीवन जीने की कला का ज्ञान भी प्राप्त होता रहता था।

गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में 35 वर्ष तक ज्योग्राफी के लेक्चरर रहे-गर्ल्स कॉलेज बारां में प्राचार्य पद से कुल 40 वर्ष की सेवाओं के बाद वर्ष 2009 में सेवानिवृत्त हुए 71 वर्षीय डॉ. वीसी जैन ने अपने बचपन में झालावाड़ के बकानी कस्बे में अपने गुरु से गुरुकुल में शिक्षा अर्जित की। वहीं, गीता के ज्ञान का हृदय में बीजारोपण हुआ। गीता के हर अध्याय को गहनता से समझा और कुशलतापूर्वक सीखा। डॉ. जैन आज भी उन्हीं संस्कारों के बीच जी रहे हैं। गीता के बारे में वृहद ज्ञान प्राप्त करने से आज भी वे वर्ष दो बार गीता जयंती एवं गुरुपूर्णिमा पर बकानी गुरुकुल में जाकर गीता पर प्रबुद्धजनों को व्याख्यान देते हैं। गीता ज्ञान पर उनकी गीताभाव प्रसाद श्रीमद् भगवत गीता का हिंदी पद्य में भावानुवाद पुस्तक प्रकाशित हुई है। जिसमें शब्दार्थ, निहितार्थ एवं लक्ष्यार्थ गीता के 700 श्लोकों का पद्य अनुवाद किया है। डॉ. जैन मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान में जैन विरासत के भौगोलिक आयाम पर कार्य कर रहे हैं। डॉ. जैन की दर्शन अध्यात्म धर्म, वैदिक व जैन दर्शन में शोधपरख रुचि रही है। कविता सृजन में रुचि रखने वाले डॉ. वीसी जैन की पांडुलिपि-वर्तमान में रहो-तैयार है, जो जल्द प्रकाशित होगी।

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