जुगनू-जुगनू करके तेरे मिलन के दीप जलाए हैं
लाखेरी| शहर के अली शेर बाबा के मजारे मुकद्दस पर गुरुवार देररात सूफीयाने कलाम ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अली शेर बाबा के 60वां उर्स मुबारक पर कोटा से आए कव्वाल अबरार हुसैन ने सूफीयाने कलाम का आगाज मनकबत से किया। उन्होंने दुनिया को ईश्वर की बेहद खूबसूरत कायनात बताते हुए भारत की तरक्की की दुआ की। उन्होंने कहा मेरे मौला मेरे भारत को सलामत रखना। नाते पाक में नबी की शान में कहा-यह है नबी का जलवा कि अंधे भी देखने के लिए तलबगार हो गए। आगे कलाम में पेश किया कि कोई भी तुमसा सखी नहीं, है यही हकीकत मदीने वाले। लोगों की फ़रमाइश पर कव्वाल अबरार ने उर्दू की प्रेम पर आधारित चर्चित गजल बोले कफारा ( प्रायश्चित) पेश की-दिल गलती कर बैठा मेरे दिल की तौबा-पर श्रोता झूम उठे। उन्होंने कहा कि जुगनू-जुगनू करके तेरे मिलन के दीप जलाए हैं। सूफीयाने अंदाज में प्रस्तुत इस गजल में बोल पर लोग वाह वाह करने लगे। सूफीयाने कलाम के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अली के लाल में कर्बला के शहीद ए आज़म इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। बाद में गरीब नवाज अाैर दूल्हा सुनाई। बतौर अतिथि चेयरमैन कुसुमलता महावर, पार्षद पवन गोयनका, एसीसी एचआर प्रबंधक भूपेंद्रसिंह बैस शामिल रहे। इस दौरान उर्स कमेटी के रुखसार पठान, अबरार अंसारी, मुशाहिदअली, फरीद अंसारी, हनीफ़ मोहम्मद, दानिशअली, रईस अंसारी, हुसैन खान, शकील मंसूरी, बानू मौजूद रहे।