आसमान की ओर उम्मीद भरी नजर...

Bundi News - बूंदी| मानसून की पहली अच्छी बरसात ने किसानों की उम्मीदें जगाई। किसानों ने जमकर धान की रोपाई कर दी, पर फिर बादल दगा...

Bhaskar News Network

Jul 17, 2019, 07:25 AM IST
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बूंदी| मानसून की पहली अच्छी बरसात ने किसानों की उम्मीदें जगाई। किसानों ने जमकर धान की रोपाई कर दी, पर फिर बादल दगा दे गए। ताजा रोपा गया धान सूखने लगा है। इस सीजन में खेत पानी से लबालब होने चाहिए, वे सूखे पड़े हैं और उनमें दरारें पड़ गई हैं। धान की पौध सूखे तिनकों में बदलती जा रही है। नहरें भी अभी खोली नहीं गई हैं। 10 दिनों से बरसात हो नहीं रही। किसान बारिश के लिए टोटकों का सहारा भी ले रहे हैं।

प्रति बीघा धान का बुआई खर्च-4000-4500 रुपए

एक बीघा धान की फसल की सिंचाई पर चार घंटे में 250 रुपए का डीजल खर्च हो जाता है। 400 रुपए हंकाई खर्च, गरड़ करने पर प्रति घंटा हजार रुपए, एक हजार रुपए का बीज पर 500 रुपए, पौध लगाने पर 1500 रुपए मजदूरी, किसान की मेहनत इसमें शामिल नहीं है। -जैसा कि गणपतपुरा के किसान मांगीलाल ने बताया

दगा दे गए बादल, 10 दिनों से बारिश गायब, खेतों में पड़ रही दरारें, अभी से सूखने लगी धान की फसलें

2019 : टारगेट और अब तक बुआई (हैक्टेयर में)







1 से 15 जुलाई तक बरसात

2012- 121.36

2013- 162.91

2014- 18.16

2015- 76.16

2016- 132.0

2017- 26.00

2018- 10.57

2019- 22.16

विशेष: इन आठ साल में महज तीन साल ही 1 से 5 जुलाई तक अच्छी बरसात हुई है, फिर भी किसान धान की खेती का मोह छोड़ नहीं रहे, जबकि उन्हें कम पानी वाली उड़द, मक्का, सोयाबीन जैसी फसलें करनी चाहिए। दलहन फसलों में मुनाफा भी अच्छा मिल जाता है। गौरतलब है कि बूंदी में धान की खेती ज्यादा ही होती है। यहां के चावल उम्दा किस्म के होते हैं। फोटो: दिनेश शर्मा

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