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भ्रम की कोई दवा नहीं: विश्रांतसागर

एक वर्ष पहले
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कापरेन. कस्बे के श्रेयांसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार को प्रवचन में जैनमुनि विश्रांत सागर महाराज ने कहा कि भ्रम एक ऐसा रोग है कि जिसकी कोई दवा नहीं है। भ्रम के कारण भाई-भाई, सास-बहू, देवरानी-जेठानी, मित्र-मित्र से गुरु-शिष्य से अलग हो रहे हैं। इसका मूल कारण भ्रम ही है। भ्रम पिता को शत्रु बना देता है, भ्रम शिष्य को गुरु से अलग कर देता है। भाई-भाई में दीवार खड़ी कर देता है, भ्रम वह रोग है जिसकी कोई भी दवा नहीं है। इससे पहले सुबह साढ़े सात बजे मुनिश्री के सानिध्य में शांतिधारा हुई, जिसका सौभाग्य अभयकुमार, अनिलकुमार नगेदा को प्राप्त हुआ, मुनिश्री की आहारचर्या महेश बरमुंडा ने की।
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