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सदस्यों का दर्द; 5 साल तक बहुत सवाल उठाए, अधिकारी और कर्मचारी सुनते ही नहीं, फिर इस बैठक का क्या औचित्य

Bundi News - जिला परिषद बोर्ड की अंतिम बैठक में कई बड़े मुद्दे उठे। 23 सदस्यों वाले बोर्ड की बैठक में ज्यादातर सदस्य, अधिकारी भी...

Dec 10, 2019, 07:50 AM IST
Bundi News - rajasthan news pain of members raised a lot of questions for 5 years officials and staff do not listen then what is the rationale of this meeting
जिला परिषद बोर्ड की अंतिम बैठक में कई बड़े मुद्दे उठे। 23 सदस्यों वाले बोर्ड की बैठक में ज्यादातर सदस्य, अधिकारी भी मौजूद रहे। कलेक्ट्रेट हॉल खचाखच था। अंतिम बैठक में सदस्यों का दर्द भी झलका। सदस्य रामावतार शर्मा ने सदन में जिला परिषद सदस्यों की पीड़ा और पांच साल की बैठकों का निचोड़ रख दिया। उन्होंने कहा कि दुख इस बात का है कि सदस्याें ने पांच साल में बहुत से सवाल उठाए, उनमें एक पर भी एक्शन हुआ तो बता दें? अधिकारी-कर्मचारी जब सुनेंगे ही नहीं तो बैठकों और हमारे जनप्रतिनिधि होने का औचित्य क्या है? सदस्यों का कहना था कि उनका काम अनुमोदन का रह गया।

सदस्यों से मशविरा करना चाहिए। हम भी चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं, सम्मान होना चाहिए। थोड़ी देर बाद ही सदन में इसका उदाहरण भी सामने आ गया...जब सीईओ ने जैव विविधता समितियों के गठन का जिक्र छेड़ा तब सदस्य रामावतार शर्मा को पता चला कि वे समिति के अध्यक्ष हैं। बीमार होने के कारण जिला प्रमुख सोनिया गुर्जर लेट आई और कुछ देर ही रही, कलेक्टर भी नहीं थी। उपजिला प्रमुख सत्येंद्र मीणा ने सदन की कमान संभाली। एडीएम सीलिंग अमानुल्लाह खान ने कलेक्टर का प्रतिनिधित्व किया। जिला परिषद सीईओ मुरलीधर प्रतिहार ने एजेंडा रखा। केपाटन विधायक चंद्रकांता मेघवाल, हिंडाैली प्रधान ममता गुर्जर, केपाटन प्रधान प्रशांत मीणा, बूंदी प्रधान मधु वर्मा, जिप सदस्य महेश दाधीच, रामावतार शर्मा, नुपूर मालव, कोमल जैन, मुरली मीणा ही पूरे वक्त छाए रहे। उन्होंने ही अधिकारियों की क्लास ली।

गूगल पर गांव, जीपीएस से रूट जनरेट

पीडब्लूडी एसई बीआर क्षत्रिय ने बताया कि बूंदी प्रदेश के उन चार-पांच जिलों में चुना है, जिनमें पीएमजीएसवाई में बनने वाली सड़कें, गांव, आबादी, सभी सुविधाएं ऑनलाइन की जा रही हैं। जीपीएस से रूट जनरेट किए गए हैं।

उपजिला प्रमुख ने एसई से मांगा जवाब...जले ट्रांसफार्मर बदलने में देरी क्यों

किसानों को दिन में बिजली क्यों नहीं

सदस्यों ने डिस्काॅम एसई से पूछा कि हिंडाैली में ही क्यों, बूंदी-केपाटन के किसानों को भी दिन में बिजली दो। एसई सवाल पर बचाव करते दिखे। उनका कहना था कि सिंचाई के लिए बिजली दिन-रात के ब्लॉक में दी जा रही है, जहां के ट्रांसफार्मरों की कैपेसिटी है, वहीं दिन में बिजली दी जा रही है। वे कुछ छिपाते नजर आए।

जले ट्रांसफार्मर बदलने में एक महीना लग रहा

सदस्य रामावतार शर्मा, महेश दाधीच, केपाटन, हिंडाैली-बूंदी प्रधान ने जले बिजली ट्रांसफार्मर 72 घंटे में नहीं बदलने का मुद्दा उठाया। उप जिला प्रमुख सत्येंद्र मीणा ने भी एसई से जवाब मांगा? सदन का कहना था कि एक-डेढ़ महीने तक ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे। काफी देर गरमागर्मी हुई। एसई ने माना 10 और 16 की केपेसिटी के ट्रांसफार्मरों की शॉर्टेज है, इसलिए वक्त लग रहा है। हमें 835 नए ट्रांसफार्मर चाहिए, अभी 256 जले हुए हैं। 100 ट्रांसफार्मर आए थे, फेल होने पर लौटाने पड़े। सदस्यों का कहना था कि फसल तो पहले ही बर्बाद हो चुकी।

झालीजी का बराना प्रोजेक्ट का क्या हुआ

झालीजी का बराना पेयजल प्रोजेक्ट के भविष्य और करवर की 14 पंचायतों को नैनवां को पेयजल योजना से काटने पर सवाल उठा। पीएचईडी एक्सईएन का कहना था कि सरकार के प्रोजेक्ट के डैम के पुनरीक्षण के आदेश हैं, पुराना टेंडर रद्द कर दिया गया है, वहीं जलजीवन मिशन में 35 लीटर की बजाए प्रति व्यक्ति 55 लीटर का प्रावधान करने से नए सिरे से समीक्षा करनी होगी। 14 पंचायतें नौनेरा प्रोजेक्ट से जोड़ने की योजना है।

आरओबी का डिजायन क्यों बदला

केपाटन में बूंदी रोड रेलवे फाटक पर थ्री लेग ओवरब्रिज का मसला उठाया। विधायक और केपाटन प्रधान का कहना था कि कुछ लोगों के दबाव में पहले बने डिजाइन को बदला गया। 120 करोड़ रुपए खर्च कर एक्सीडेंटल जोन बनाया जा रहा है। कोटा रोड पर ट्रैफिक जाम हो जाएगा। टेक्नीकल फॉल्ट से दो-ढाई हजार गाड़ियां प्रभावित होंगी, 300 परिवार उजड़ जाएंगे, चौराहे का सौंदर्य बिगड़ेगा।

ब्लड के लिए कलेक्टर से कहलाओ

बूंदी ब्लड बैंक से जरूरतमंदों को ब्लड नहीं मिलने का मसला उठाया। सदस्यों का कहना था कि फोन करने पर कहा जाता है कि कलेक्टर से कहलवाओ, तभी ब्लड मिलेगा। कोई मर रहा, ब्लड नहीं मिल रहा। पीएमओ बोले-इमरजेंसी और एक्सीडेंटल केस में डॉक्टर बिना किसी इजाजत के ब्लड देने के लिए अधिकृत हैं, पाबंदी नॉर्मल केस में हैं। जनाना अस्पताल में चोरियों पर पीएमओ ने बताया कि पांच कैमरे अब लगेंगे। संजय कॉलोनी शहर में है या ग्राम पंचायत में

सदस्य महेश दाधीच ने पूछा कि 5 हजार लोगों की संजय कॉलोनी के लोग गांव-शहर के बीच झूल रहे हैं, उनके लिए बिजली, पानी, सड़क का बंदोबस्त किसकी जिम्मेदारी है। सीईओ ने मामला दिखवाने की बात कही।

बाढ़ से पीड़ित परिवारों का मसला उठा

अतिवृष्टि-बाढ़ पीड़ितों का मसला भी सदन में उठा, सदस्यों ने पूछा कि अब तक खेतों में बिजली पोल तक खड़े नहीं किए गए हैं। ठेकेदार किसानों से पैसा मांग रहे हैं।

आचार संहिता लग जाएगी, तब मिलेगा क्या एफएफसी का पैसा

सदन में एफएफसी का पैसा पंचायतों को नहीं मिलने का मुद्दा उठा। सदस्यों का कहना था कि एक साल तक राज्य सरकार से पंचायतों को विकास के लिए कुछ नहीं मिला, अब केंद्र से एफएफसी का आया पैसा भी नहीं मिल रहा। सीईओ ने बताया कि राशि पंचायत समितियों को ट्रांसफर कर दी है, बिल ट्रेजरी में जा चुके, वहां अटक गए। ट्रेजरी की लिमिट राेज 2 करोड़ रुपए के बिल क्लीयर करने की है। सदस्यों का कहना था कि 184 पंचायतों का सवाल है, सीलिंग खत्म की जाए। प्रधानों का कहना था हम सरपंचों को क्या जवाब दें, आचार संहिता लगने वाली है, फिर पैसा किस काम का। विधायक ने सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने की बात कही, जिसका उप जिला प्रमुख और कांग्रेस सदस्यों ने विरोध किया।

बूंदी-केपाटन के किसानों को जमीन का मालिकाना हक क्यों नहीं

विधायक, केपाटन प्रधान ने एडीएम सीलिंग से पूछा हिंडाैली विधानसभा क्षेत्र के किसानों को सिवायचक भूमि का मालिकाना हक दिया जा रहा है। बूंदी-केपाटन के किसानों को क्यों नहीं? बिना गजट नोटिफिकेशन के ऐसे शिविर कैसे लगाए जा सकते हैं? यह भेदभाव क्यों? एडीएम इस सवाल पर घिर गए, स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए, यही कहते रहे हमारे पास दो ही तहसीलों के डेटा आए हैं।

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