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संयम आत्मा का सुरक्षा कवच: सुकुमालनंदी

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 04:51 AM IST

Bundi News - आजकल जब भी किसी नियम-बंधन की बात की जाती है तो मनुष्य उसे बोझ समझ कर उससे दूर जाना चाहता है। नियम-बंधन सांसारिक हो या...

lakheri News - rajasthan news permanence of the soul shukumalanadi
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आजकल जब भी किसी नियम-बंधन की बात की जाती है तो मनुष्य उसे बोझ समझ कर उससे दूर जाना चाहता है। नियम-बंधन सांसारिक हो या आध्‍यात्मिक, वे हमारे आवश्यकता के अनुरूप ही होते हैं। मनुष्य को इस तरह के नियम-बंधन (दासता) नहीं समझना चाहिए। यह बात आचार्य सुकुमालनंदी ने इंद्र इंद्राणियों से नंदीश्वर विधान के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि शरीर का सार ही संयम-व्रत धारण करना है। मनुष्य कहते हैं कि नियम बंधन के रूप मे होते हैं, हम उसमें बंध जाते हैं। आचार्य ने कहा कि जिस तरह ठंड लगने पर शरीर को गर्म कपड़े की आवश्यकता होती है। ठीक उसी तरह नियम संयम व्रत धारण करना कोई बंधन नहीं होता, बल्कि यह आत्मा की सुरक्षा के लिए जरूरी है। जिस तरह मौसम परिवर्तन पर शरीर के परिधान बदल जाते हैं। वे बंधन नहीं लगते, उसी तरह आत्मा के परम ज्ञान की प्राप्ति के लिए संयम व्रत नियम आवश्यक है। संयम आत्मा की सुरक्षा कवच की तरह होते हैं। संयम के बिना मानव जीवन मात्र एक खाली खोखा है। इससे पहले आठ उपवास रखने वाले आचार्य के दीक्षित शिष्य सुलोकनंदी का मंगलाचरण हुआ।

लाखेरी. कार्यक्रम में स्तुति करते इंद्र-इंद्राणी।

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