शहनाई की जगह सिसकियों के बीच कविता के सात फेरे

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:36 AM IST

Bundi News - बूंदी. गणेशपुरा में फेराें पर बैठी दुल्हन। सादगी से दस्तूर निभाया। भास्कर न्यूज | बूंदी यह ऐसी शादी थी, जिसमें...

Bundi News - rajasthan news seven rounds of poetry among the people in place of clarinet
बूंदी. गणेशपुरा में फेराें पर बैठी दुल्हन। सादगी से दस्तूर निभाया।

भास्कर न्यूज | बूंदी

यह ऐसी शादी थी, जिसमें शहनाई की जगह सिसकियों के बीच सात फेरे लिए जा रहे थे। शादी की खुशियां काफूर थीं, मन रो रहा था, पर फेरे तो करवाने ही थे। पूरा गांव गमजदा था। उस भाई का दर्द समझा जा सकता है, दोपहर में सगी बहन को मुखाग्नि और शाम को बेटी की शादी कर रहा हो। रिश्तेदारों के लिए भी यह दुखद था, पहले दाह संस्कार में शामिल हुए और फिर शादी में। मरण-परण दो रंग एक साथ, दो संस्कार दाह संस्कार और पाणिग्रहण संस्कार। शायद इसी का नाम जिंदगी है।

शहर के 11 किमी दूर गणेशपुरा गांव में गुरुवार शाम शादी के नेगचार (बासण पूजन) के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से दुल्हन कविता की बुआ लाड़कंवर बाई की मौत हो गई थी। दुल्हन की मां सहित 21 से ज्यादा रिश्तेदार, ग्रामीण इसकी चपेट में आकर अस्पताल पहुंच चुके थे। शुक्रवार दोपहर बुआ का अंतिम संस्कार हुआ और शाम को कविता को मंडप में बैठना पड़ा। खुद दुल्हन आकाशीय बिजली के शॉकवेव के बाद गुरुवार शाम से अस्पताल में भर्ती थी, पर सुबह अस्पताल से छुट्‌टी लेनी पड़ी, क्योंकि शाम को सात फेरे लेने थे। वह पूरी तरह ठीक भी नहीं हुई थी। परम्परा है कि तेल चढ़ने के बाद दुल्हन के फेरे टाले नहीं जा सकते, कविता को यह रस्म निभानी पड़ी तो पिता हजारीलाल मीणा, मां राजेश को भी कन्यादान का दस्तूर निभाना पड़ा। पूर्वाह्न 11:30 बजे अस्पताल में भर्ती परिवार और रिश्तेदार छुट्‌टी लेकर गणेशपुरा पहुंचे, जहां दुल्हन व उसकी मां को ड्रिप चढ़ाई गई, राहत मिलने पर शादी की रस्मे निभाई गई। शाम 7 बजे खटकड़ से दुल्हा और बारात पहुंची। कोई स्वागत या खुशी नहीं, बस दस्तूर अदायगी की गई, तोरण मारकर रात 9 बजे फेरे हो गए।

बैंडबाजा ना डांस, ना दूल्हे के लाड़-चाव

परिवार ने कविता की शादी की जोरदार तैयारी कर रखी थी। बैंडबाजा, दो हजार लोगों के लिए खाना बनाया गया था पर कुदरत को कुछ और मंजूर था। सब धरा रह गया। ना बारात की सेवा हो पाई, ना दूल्हे-दुल्हन के लाड़-चाव हो पाए। इधर, गांव में दो और भी शादियां थीं, वहां भी इस हादसे का असर था, उन घरों में समारोह सादगी से हुआ। हादसे के 24 घंटे बाद भी गांववाले सदमे से उबरे। गांव में सन्नाटा पसरा रहा।

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