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खेतों को नहीं मिला पानी, किसान अनशन पर

एक वर्ष पहले
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नहरी पानी के लंबे तकाजे के बावजूद किसानों की फरियाद का सीएडी के इंजीनियराें पर कोई असर नहीं हुआ तो शनिवार को टेल क्षेत्र के किसान नहरी पानी की समस्या को लेकर एसडीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते हुए अनशन पर बैठे गए। किसान गेहूं की बुवाई के बाद से ही नहरी पानी की मांग करने लगे थे, लेकिन पिछले डेढ़ महीने से सीएडी के इंजीनियर महज आश्वासन देकर समस्या को लंबित बनाए हुए है। किसानों की नहरी पानी की पुरजोर माग के बावजूद प्रशासन पर कोई खास असर नजर नहीं आया तो वे अनशन पर आ गए। किसानों का कहना है कि लगातार विभाग अधिकारियों को पत्र ज्ञापन ओर मोबाइल पर नहरी पानी की मांग करते आ रहे, लेकिन बीते डेढ़ माह में कोई नतीजा नहीं निकला। किसानों का कहना है कि वे नहरी पानी लेकर ही जाएंगे।

किसानों का कहना है कि विभाग को समय-समय पर नहरी की सफाई करवाने की मांग करने के बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। नहरों में जंगल से लेकर काई अत्यधिक मात्रा में जम गई है। जिसके चलते नहरों में जल प्रवाह ठप हो गया है। टेल क्षेत्र तक नहरी पानी पहुंचना तो दूर की बात झपायता के आसपास ही नहरों में पर्याप्त पानी का प्रवाह नहीं बन पा रहा है। जबकि इसके आगे तो एक लंबा नहरी तंत्र स्थापित है। हालत यह है कि किसान खुद नहरों की सफाई में लगे है बावजूद उनको पानी नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति तो तब है जब नहरी सिस्टम सुधारने ओर खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए अधिकारी व जन प्रतिनिधि गांवों के चक्कर लगा रहे है।

अरनेठा तक नहीं पहुंचा पानी

जयस्थल. अरनेठा डिस्ट्रीब्यूटरी और जयस्थल माइनर तक पानी नहीं पहुंचने से किसानों की गेहूं की फसल सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। जल्द पानी नहीं मिला तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। दोताना के किसान महेंद्र गोचर, जुगराज, मांगीलाल, कोड़क्या के किसान धर्मराज गुर्जर, दुर्गाशंकर, मोलतराम, करवाला की झोंपड़ियां के महावीर मीणा, बाबूलाल, कन्हैयालाल, पीपल्दा सम्मेल गांव के देवराज मीणा, सत्यनारायण मीणा ने बताया कि सीएडी अधिकारियों की ओर से गेज मेंटेन नहीं करने से समस्या बनी हुई है। जल प्रबंधन समिति अध्यक्ष देवलाल गुर्जर ने बताया कि सीएडी अधिकारियों को बार-बार गेज मेंटेन को कहने के बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उधर, डीएसपी जेईएन रिंकू मीणा ने बताया कि टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। तीन-चार दिन में टेल तक पानी पहुंच जाएगा।

पैदावार पर पड़ सकता है असर

टेल क्षेत्र में नहरी पानी नहीं पहुंचने से किसानों को खासी चिंता तो है, वहीं बाढ़ का दंश झेल चुके किसानों को फसल की पैदावार पर भी संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि नहरी पानी नहीं मिलने से गेहूं की पैदावार प्रभावित होने की आशंका बनने लगी है। ऐसे में किसानों के सामने ऐसी स्थिति बन गई है कि वे या तो फसल को भगवान भरोसे छोड़ दे या फिर रुपया खर्च करके अन्य संसाधनों से खेतों की सिंचाई करें। निजी संसाधनों से सिंचाई करना भी अधिकांश किसानों के लिए संभव नहीं है।

लगातार नहरी पानी की मांग करने के बावजूद खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। फसलें सूखने के कगार पर है और विभाग बहाने बनाकर समस्या को टरका रहा है। किसान मजबूर हैं। किसानों को तो केवल नहरी पानी चाहिए।
-पवन मीणा, पूर्व सरपंच माखीदा

नहरों में जल प्रवाह ठप हो गया है। टेल क्षेत्र तक नहरी पानी पहुंचना तो दूर की बात झपायता के आसपास ही नहरों में पर्याप्त पानी का प्रवाह नहीं बन पा रहा है। जबकि इसके आगे तो एक लंबा नहरी तंत्र स्थापित है। हालत यह है कि किसान खुद नहरों की सफाई में लगे है बावजूद उनको पानी नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति तो तब है जब नहरी सिस्टम सुधारने ओर खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए अधिकारी व जन प्रतिनिधि गांवों के चक्कर लगा रहे है।

जयस्थल. सूखा पड़ा जयस्थल माइनर।

लाखेरी. टेल क्षेत्र के किसान नहरी पानी की मांग को लेकर धरने पर बैठे।
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