Hindi News »Rajasthan »Chanana» क्या किसी गांव को आत्म-निर्भर बनाने में मदद की है?

क्या किसी गांव को आत्म-निर्भर बनाने में मदद की है?

कल्पना करें कि आप 7,500 फीट की ऊंचाई पर अछूते पाइन और देवदार के वृक्षों के आगोश में हैं, जहां से गहरी खाई नज़र आती है, जिसे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 16, 2018, 03:55 AM IST

कल्पना करें कि आप 7,500 फीट की ऊंचाई पर अछूते पाइन और देवदार के वृक्षों के आगोश में हैं, जहां से गहरी खाई नज़र आती है, जिसे दहाड़ती सुपिन नदी ने तैयार किया है और यह नदी टौंस नदी में मुख्य योगदान देती है। टौंस नदी यमुना नदी की मुख्य सहायक नदी है। शांति इतनी गहरी है कि अापको पास में खड़े व्यक्ति की सांसें भी सुनाई देती हैं। हमारे देश के सबसे दूर मौजूद कलाप गांव में आपका स्वागत है, जो उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में मौजूद है। इतनी दूर होने की कठोरताओं के कारण यहां के लोगों को चिकित्सा सहायता छोड़ दें तो रहने, खाने और पहनने की हर चीज खुद बनानी पड़ती है। टौंस घाटी के दूरवर्ती ऊपरी हिस्से में बसे 35 गांवों के 20 हजार लोगों के लिए मेडिकल सहायता बहुत ऊंची लागत पर मिल पाती है कोई 5,000 रुपए प्रतिदिन, जो प्रमुख बड़े शहरों में भी 500 रुपए से अधिक नहीं है। इसलिए नहीं कि अच्छा अस्पताल 210 किलोमीटर दूर देहरादून में है बल्कि इसलिए भी कि उफनती टौंस नदी को पार करने के लिए न सड़कें हैं और न ही पुल है।

बेंगलुरू के पूर्व फोटो जर्नलिस्ट आनंद शंकर पहली बार इस गांव में 2008 में आए थे। इस जगह की अछूती सुंदरता और सरल, सीधे लोगों ने उनके दिल को छू लिया। उसके बाद वे कई बार वहां गए। ऐसी ही एक यात्रा में उनकी मुलाकात बुखार में तपती बूढ़ी महिला से हुई। उन्होंने उसे पैरासिटामोल की गोली दी और जब उसका बुखार उतर गया तो वह उनके कदमों में गिर पड़ी। 2014 में उन्होंने वहां पहला हैल्थ कैम्प लगाया, जिससे वे बहुत विचलित हो गए, क्योंकि पता चला कि कई गांव वालों को टीबी था। फिर उन्होंने वहां के लोगों की ज़िंदगी में सुधार लाने के लिए कलाप ट्रस्ट स्थापित किया। अानंद के इस वेंचर में स्टोरी टेलर फ्रेंड बेंगलुरू के ही मयूर चन्नागेरे की मदद मिली। उन्होंने अब तक 19 लाख रुपए इकट्ठे किए हैं, जबकि वहां छोटा-सा अस्पताल शुरू करने के लिए अप्रैल 2018 तक 50 लाख रुपए इकट्ठे करने का लक्ष्य है। वहां हैल्थ केयर सेंटर ने काम भी शुरू कर दिया है।

कलाप ट्रस्ट ने शिक्षा को भी गंभीरता से लिया। सरकारी स्कूल को उनकी शिक्षण सुविधाओं की मदद मिलने लगी, जो स्कूल के नियमित घंटों के बाद शुरू होती है। छुट्टी और लंबे अवकाश के दिन शिक्षण का यह काम पूरे समय चलता है। वे बच्चों को अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण देते हैं ताकि बच्चे बाद के शैक्षिक जीवन में आसानी से अपने को एडजस्ट कर सकें। कठपुतलियों, गीत, कहानियों, प्रकृति की व्याख्या और बाहर की अनुभवगत शिक्षा के जरिये वे उन्हें गणित व विज्ञान सिखाते हैं। गांव पावर ग्रिड से जुड़ा है पर पावर लाइन इतनी कमजोर है कि समुदाय की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाती। इस ऊर्जा संकट को सुलझाने के लिए कलाप ट्रस्ट ने दीर्घावधि के समझौता-पत्र (एमओयू) के जरिये मेसर्स ई-हैंड्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के साथ गांव के लिए अक्षय ऊर्जा मिनी ग्रिड स्थापित करने की पहल की है। उसके लिए लोग प्रतिमाह 200 रुपए दे रहे हैं।

आनंद ने कम्युनिटी टूरिज्म प्रोग्राम भी शुरू किया है, जिससे लोगों को अच्छा रोजगार मिल जाता है। स्थानीय स्त्री-पुरुषों को माउंटेन गाइड और कैंप साइट पर खाना पकाने, मेहमानों की देखभाल करने आदि जैसी गतिविधियां अंजाम देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। ग्रामीण घरों में उपलब्ध कमरों का इस्तेमाल होम स्टे के रूप में किया जाता है। वहां आने वालों को स्थानीय संस्कृति, ग्रामीणों से रूबरू होने, स्थानीय व्यंजनों और प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाने का मौका मिलता है।

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Chanana News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: kyaa kisi gaaanv ko aatm-nirbhar banane mein mdd ki hai?
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Chanana

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×