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कक्षा कक्ष में बन रहा था पोषाहार, बच्चे बाहर बैठकर पढ़ रहे, कैशबुक में नहीं की एंट्री, गबन की भी आशंका

Chittorgarh News - भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ सरकारी स्कूलों में पोषाहार की गुणवत्ता परखने के अभियान में व्यवस्थाओं की पोल...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 02:40 AM IST
कक्षा कक्ष में बन रहा था पोषाहार, बच्चे बाहर बैठकर पढ़ रहे, कैशबुक में नहीं की एंट्री, गबन की भी आशंका
भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

सरकारी स्कूलों में पोषाहार की गुणवत्ता परखने के अभियान में व्यवस्थाओं की पोल खुलकर सामने आई। कुछ जगह तो पोषाहार वितरण ही नहीं हो रहा था। कहीं खाद्यान्न का रखरखाव सही नहीं पाया।

अधिकांश स्कूलों में कैश बुकों में एंट्री सही नहीं मिली। इससे गबन की आशंका भी जताई गई। पोषाहार संबंधी जानकारी के लिए स्कूलों में प्रशासनिक अधिकारियों के तो दूर, संस्था प्रधानों एवं प्रभारियों के नंबर तक नहीं लिखे पाए। राज्यव्यापी दो दिवसीय विशेष अभियान के तहत जिले में कलेक्टर ने 27 जिलास्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई थीं। चार प्रशासनिक अधिकारियों को एक-एक तथा अन्य अधिकारियों को दो-दो स्कूल आबंटित किए थे। जिले के 1850 में सेदा 320 स्कूलों का निरीक्षण हुआ। जिले में 11 में से नौ ब्लाकों की मोटे तौर पर रिपोर्ट डीईईओ कार्यालय पहुंच गई थीं।

पोषाहार बनाने को किचनशेड ही नहीं, बजट तो आया लेकिन पर्याप्त नहीं था

खबर छपने पर पांच दिन बाद पोषाहार शुरू हुआ... डीईओ माध्यमिक हेमंत कुमार द्विवेदी ने रामावि देवरों का खेड़ा का निरीक्षण किया था। पांच दिन से पोषाहार नहीं बनने की बात सामने आई। दैनिक भास्कर में इस संबंध में समाचार को विभाग ने गंभीरता से लेते हुए बुधवार को ठेकेदार को पाबंद करते हुए खाद्यान्न सामग्री भिजवाई तथा पोषाहार बनना शुरू हुआ।

कैश बुक में एंट्री नहीं और रखरखाव भी सही नहीं... एबीईईओ आलोक सिंह राठौड़ के पंचतौली एवं श्रीनगर उप्रावि मेंं निरीक्षण के दौरान कैश बुक में एंट्री नहीं पाई। पोषाहार प्रभारी के मोबाइल नंबर भी नहीं पाए। स्कूल में पोषाहार कक्ष के बाहर कलेक्टर, एडीएम, एसीईओ, डीईओ, बीईईओ कार्यालय, संस्था प्रधान एवं पोषाहार प्रभारी के नंबर अंकित होने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं पाया।

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जिले की कई स्कूलों में अभी भी किचनशेड नहीं बने होने के कारण कक्षा-कक्षों में पोषाहार बनता पाया। सीएमएचओ ने संस्कृत शिक्षा का राउमावि राशमी एवं उप्रावि गोपालपुरा का निरीक्षण किया। दोनों स्कूलों में एक-एक कक्षा कक्ष में पोषाहार बनता हुआ पाया तथा बच्चे बाहर पढ़ते हुए पाए। जानकारी करने पर पाया कि किचन बनाने के लिए कुछ बजट आया, लेकिन और बजट का इंतजार है।


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पोषाहार खाद्यान्न की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल... बड़ीसादड़ी ब्लाक में 33 स्कूलों के निरीक्षण किए थे। दो स्कूलों पर टिप्पणी आई। अंबावली एवं बागेला का खेड़ा में गेहूं क्वालिटी कमजोर पाने की बात सामने आई है।

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पोषाहार टेस्ट करने का रजिस्टर नहीं मिला... मिड डे मिल में प्रतिदिन पोषाहार चखने का नियम है। इसका उल्लेख एक रजिस्टर में करना होता है, लेकिन अभी कई स्कूलों में रजिस्टर बनाया तक नहीं है। शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी जसोदा बसेर ने राजकीय बालिका उमावि भदेसर का निरीक्षण किया। पोषाहार चखने का रजिस्टर मांगा, लेकिन नहीं पाया।

यह भी कमियां




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