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दस प्रतिशत लोगों ने दिए 10 में से 7 अंक, बाकी ने 5 या इससे भी कम दिए, करदाताओं को नहीं मिली राहत

भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ आईसीएआई की चित्तौड़गढ़ ब्रांच पर बुधवार को केंद्रीय बजट का लाइव प्रसारण देखा...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:40 AM IST
भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

आईसीएआई की चित्तौड़गढ़ ब्रांच पर बुधवार को केंद्रीय बजट का लाइव प्रसारण देखा गया। जिसमें शहर के चार्टड एकाउंटेस और सीए स्टूडेंटस के साथ व्यापार जगत के लोग और कर सलाहकार आदि भी मौजूद थे। बजट पूरा होने के बाद हुई चर्चा में ज्यादातर सीए ने बजट को निराशाजनक अधिक बताया। कहा गया कि करदाताओं के प्रति वित्त मंत्री अरुण जेटली की कठोरता कम नहीं हुई है।

सचिव नीरव दोशी के अनुसार ब्रांच चेयरमैन सीए अर्जुन मूंदडा की अध्यक्षता में लाइव प्रसारण में व्यापारिक संस्थान के सदस्यों, उद्यमियों ने भी भाग लिया। बजट बाद विभिन्न प्रावधानों एवं सुधारों पर बहस में मिश्रित प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। अधिकांश सीए द्वारा बजट को निराशाजनक बताया गया। अरूण जेटली की करदाताओं के प्रति चिर परिचित कठोरता महसूस की गई। कृषि, वरिष्ठ नागरिक एवं फ्लेगशिप, गरीबों के लिए मेडिकल सुविधा जैसी घोषणाएं सराहनीय रही। इस चर्चा में आयकर अधिकारी टीपी संजीव, देवीदयाल बोहरा, सुरेश मालवीया, ब्रांच के पूर्व अध्यक्ष जगदीश राठी, वरिष्ठ सीए आरके न्याति, गोपाल मूंदडा, उपाध्यक्ष अशोक सोमाणी, सुनील राठी, सुरेश काबरा, दिलीप हिंगड, मनीष छाजेड, निरंजन नागौरी, निलेष जैन, दीपक सोनी, सुनील भंडारी, अमित अग्रवाल के अलावा मार्बल लघु उघोग संस्थान के अध्यक्ष विपिन्न लढढा, अशोक न्याति, अनिल नाहर, महेश माहेष्वरी आदि ने भाग लिया।

सर्वे में 90 प्रतिशत प्रतिभागी खुश नहीं दिखे

सीए ब्रांच पर केंद्रीय बजट पर चर्चा व बहस के बाद मौजूद प्रतिभागियों से सर्वे भी किया गया। उनको 10 में से अंक देने को कहा गया। दस प्रतिशत लोगों ने ही बजट को 7 या 8 नंबर दिए। करीब 50 प्रतिशत ने 5 नंबर और 40 प्रतिशत लोगों ने तो जेटली के इस बजट को एक से चार नंबर ही दिए।



व्यापारी, शिक्षाविद बोले-बजट ने किया निराश : 250 करोड टर्न ओवर वाली कंपनी को 25 प्रतिशत कर


सीए ब्रांच में केंद्रीय बजट का लाइव प्रसारण देखते ब्रांच चित्तौड़ के पदाधिकारी और सीए। बजट का विश्लेषण भी किया गया।

शहर के लिए उम्मीदें है, पर आम जन के लिहाज से कुछ खास नहीं

एक्सपर्ट व्यू

केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट आमजन के लिए आशानुरूप नहीं कहा जा सकता है। खासकर आयकर प्रावधानों से काफी निराशा रही। कारपोरेट जगत को टैक्स दर 30 से घटाकर 25 प्रतिशत की, लेकिन व्यक्तिगत में अधिकतम दर 30 प्रतिशत यथावत है। एक प्रतिशत शिक्षा सेस लगाने से सभी आयकर दरों में बढ़ोतरी होगी। सरकार से जीएसटी व नोटबंदी के बाद काफी राहत की जो उम्मीदें की जा रही थी, वैसी नहीं मिली है। सीनियर सिटीजन को ब्याज व मेडिकल में राहत व गरीब परिवारों को पांच लाख रुपए तक प्रतिवर्ष हेल्थ सुविधा अच्छी है। किसानों के लिए भी कुछ राहत है।

शहर के लिए क्या संभावना




किसी ने संतुलित को किसी ने छलावा बताया

किसानों की दशा व दिशा में सुधार की पहल


विभिन्न वर्गों को राहत वाला बजट


व्यापारी वर्ग को भी मिली निराशा


उम्मीदों से सुना पर छलावा हुआ


म्युचअल फंड पर भी टैक्स लगाकर अच्छा नहीं किया


वेतनभोगी सहित मध्यमवर्ग के लिए कुछ नहीं


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