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जिला अस्पताल में जांच करवाई तो सामान्य बताया, निजी लैब की रिपोर्ट में किडनी फेल, दो दिन बाद मरीज की मौत

प्रदेश के 22 जिलों को पीछे छोड़कर कायाकल्प योजना में तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले सांवलियाजी सामान्य चिकित्सालय...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:45 AM IST
जिला अस्पताल में जांच करवाई तो सामान्य बताया, निजी लैब की रिपोर्ट में किडनी फेल, दो दिन बाद मरीज की
प्रदेश के 22 जिलों को पीछे छोड़कर कायाकल्प योजना में तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले सांवलियाजी सामान्य चिकित्सालय में होने वाली जांचों पर सवाल उठने लगे हैं। सरकारी अस्पताल और प्राइवेट लैब में होने वाली जांचों में अंतर आ रहा है। इससे मरीजों का भरोसा उठ रहा है। जांच रिपोर्ट में अंतर का आलम ये है कि किडनी फेल वाले मरीज को सरकारी जांच में सामान्य बताया गया जबकि निजी लैब में जांच कराने पर किडनी फेल की रिपोर्ट सामने आई। इस पर परिजनों के होश उड़ गए। ऐसी एक नहीं, कई प्रकार की जांच रिपोर्ट सामने आई है। दैनिक भास्कर ने कुछ जांच रिपोर्टों की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई रिपोर्ट ऐसी मिली जिसमें सरकारी अस्पताल में नार्मल आई, लेकिन जब उन्हीं रोगियों ने प्राइवेट सेंटरों पर जांच एवं सोनोग्राफी कराई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई। ऐसे में मरीज व उनके परिजन हैरान है। वे किस रिपोर्ट को सही मानकर उपचार कराए।

इन 3 उदाहरण से समझें सरकारी और निजी लैब की रिपोर्ट में कितना अंतर, मरीज असमंजस में किसे सही मानें


1: सरकारी में नार्मल, बाहर सोनोग्राफी में पथरी बताई ... सदर बाजार निवासी दीपक सोलंकी ने बताया कि पेट दर्द होने पर 13 जनवरी को सांवलियाजी अस्पताल में डाक्टर को दिखाया। उन्होंंने जांचें लिखने के साथ सोनोग्राफी कराने की सलाह दी। 17 जनवरी को अस्पताल में सोनोग्राफी कराई। रिपोर्ट नार्मल आई। इसके बाद 20 जनवरी को एक प्राइवेट सेंटर पर सोनोग्राफी कराई तो उसमें पथरी आई।

3: जांच में सब नार्मल आया, प्राइवेट में कराया तो किडनी फेल ... यूथ फोर चेंज के सुभाष शर्मा ने बताया कि मेरे दादाजी की सांवलियाजी अस्पताल में जांच कराई थीं। इसमें ब्लड यूरिया 24.87 आया, जो नार्मल था। संतुष्ट होकर घर चले गए थे। हालत में सुधार नहीं होने के कारण निजी लैब में जांच कराई तो यूरिया 114 आया। यह जानकर होश उड़ गए कि उनकी किडनी फेल हो गई है। सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट सही नहीं थी। इसके एक-दो दिन बाद ही दादाजी का निधन भी हो गया।

बड़ा सवाल : मशीनें गड़बड़ या कार्मिक लापरवाह ? सांवलियाजी एवं महिला बाल अस्पताल में लगी सोनोग्राफी एवं जांचों की मशीनों में गड़बड़ी है या इनमें कार्य करने वाले कार्मिक काम में लापरवाही बरत रहे हैं। यह मामला अब जांच का विषय बन गया है। पहले भी यहां की रिपोर्ट में नार्मल एवं निजी सेंटर में बीमारी सामने आने की शिकायतें आई, लेकिन इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। सोनोग्राफी का रिकॉर्ड अब दो साल संभालना जरूरी ... चित्तौड़गढ़ | अब पंजीकृत सोनोग्राफी सेंटरों को अब दो साल तक रिकॉर्ड संभालकर रखना होगा। गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम के तहत सोनोग्राफी केंद्रों की ओर से रिपोर्ट और दस्तावेज कम से कम दो साल तक संभालकर रखने व प्राधिकृत निरीक्षण के दौरान उपलब्ध करवाने आवश्यक हैं। प्रावधानों के अनुसार निरीक्षण में आने वाली कमियों को दूर करने के लिए सोनोग्राफी केंद्र चैक लिस्ट उपलब्ध करवाई जाएगी।

2: हिमोग्लोबिन की रिपोर्ट भी सही नहीं आई अस्पताल में ... गांधीनगर निवासी शोभा राजौरिया ने 24 अप्रैल 2017 को महिला एवं बाल अस्पताल में गायनिक डाक्टर से चेकअप कराया। निशुल्क जांच योजना की जांच में हिमोग्लोबिन 12.01 आया। इसके बाद यही जांच एक प्राइवेट लैब पर कराई तो 10.2 आया।


प्राइवेट सेंटर एवं जिला अस्पताल की जांच में फर्क आने जैसी शिकायत नहीं मिली है। जहां तक हमारा निष्कर्ष है, जिला अस्पताल की दोनों यूनिटों में जांच रिपोर्ट सही आ रही है। फिर भी यदि कोई ऐसी शिकायत आएगी तो, जांच कराएंगे। डॉ. मधुप बक्षी, पीएमओ, श्रीसांवलियाजी राजकीय सामान्य अस्पताल चित्तौड़गढ़

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