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10 लाख का पैकेज छोड़कर कलाकारों को दिला रहे प्लेटफार्म

चित्तौड़गढ़ | कई तरह की कला और कलाकार भले लुप्त होने लगे पर कला के कद्रदान जिंदा हैं। उदाहरण है एक युवा पुनीत अराेरा।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:20 AM IST

10 लाख का पैकेज छोड़कर कलाकारों को दिला रहे प्लेटफार्म
चित्तौड़गढ़ | कई तरह की कला और कलाकार भले लुप्त होने लगे पर कला के कद्रदान जिंदा हैं। उदाहरण है एक युवा पुनीत अराेरा। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर लुप्त होते कलाकारों को प्रकाश में लाने में जुट गए। आर्ट खोज नाम से वेबसाइट बनाई। जुनून ऐसा चढ़ा कि बेंगलुरू में 10 लाख का पैकेज छोड़कर इसमें जुट गए। अब तक 100 कलाकार वेबसाइट पर ऑनलाइन प्लेटफार्म पा चुके हैं।

उदयपुर निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर पुनीत ने दस साल बेंगलुरु में रहते हुए कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग और फिर जॉब किया। जॉब में आस्ट्रेलिया, फिलिपींस, केन्या व थाईलैंड भी गए। बचपन से राजस्थानी कला और कलाकार जहन में रहे। बैंगलुरु में रहते हुए नए कलाकारों को अच्छा प्लेटफार्म उपलब्ध होते देखा तो अपने कलाकार याद आने लगे।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर पुनीत अजमेरा अब तक 100 कलाकारों की प्रोफाइल डाल चुके वेबसाइट पर

कलाकारों को इस तरह दिला रहे पहचान व काम

बाड़मेर के मांगणियार फोक ग्रुप को चित्तौड़ में बुलाया... बाड़मेर के मांगणियार फोक ग्रुप की बाड़मेर ब्रदर्स नाम से प्रोफाइल कला खोज वेबसाइट पर डाली। ग्रुप के राज महबूब को इसकी मदद से ही राजस्थान दिवस पर चित्तौड़गढ़ में प्रस्तुति देने का मौका मिला। जमशेदपुर और दिल्ली में भी इवेंट कर चुके हैं।

पेंटिंग सीखने के लिए आने लगा बुलावा... बैंगलुरु की हीमा बिंदू पीने वाली काफी से पेंटिंग्स बनाती हैं। लोगों को इस कला का ज्यादा पता नहीं था। कला खोज साइट पर प्रोफाइल आई तो प्रचारित हुईं। अब उनसे पेंटिंग सीखने के लिए काफी ऑफर आ रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर पुनीत अरोरा ने बताया कि कई कलाकार विलक्षण हैं पर पहचान नहीं मिलने से गुमनामी में हैं। सबसे बड़ी दिक्कत तो उनके बारे में पता लगाना है। जैसे-जैसे पता लग रहा है, उनको सूचीबद्ध किया जा रहा है। मकसद है कि आर्ट और आर्टिस्ट को आईटी से जोड़ दें। मौजूदा दौर में अच्छी प्रतिभा भी पिछड़ती है तो सिर्फ टेक्नोलॉजी से नहीं जुड़ पाने के कारण। बड़ा पैकेज छोड़ने का गम नहीं है। इवेंट कंपनियों से कलाकारों को जोड़ने के एवज में जो कुछ फीस मिल जाए, उससे संतुष्ट हूं।

इन कलाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास

कला खोज प्रोजेक्ट से राजस्थान की मिनियेचर, पेंटिंग्स, मोलेला, ग्लास, मांडना, फोक डांस, फोक म्यूजिक, कच्छी घोड़ी, कालबेलिया, मांगणियार लंगा के साथ राजस्थानी क्लासिकल म्यूजिशियन, कठपुतली कलाकारों व गांवों में बैग्स बनाने वाले कलाकारों को आगे बढ़ाना मकसद है। पुनीत वेबसाइट पर चिह्नित कलाकार की पूरी प्रोफाइल बना रहे हैं। इससे इन कलाकारों की जानकारी उन जगहों तक पहुंच रही है। जहां उनको लोग नहीं जानते।

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