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भूजल के अति दोहन से

सात-सात दिन सप्लाई का इंतजार करने वाले शहर में 20 फीट पर पानी, 24 घंटे मोटर चलाकर बेसमेंट खाली करने की नौबत ...क्योंकि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 07:50 AM IST

सात-सात दिन सप्लाई का इंतजार करने वाले शहर में 20 फीट पर पानी, 24 घंटे मोटर चलाकर बेसमेंट खाली करने की नौबत ...क्योंकि रोज चंबल से 480 लाख लीटर आपूिर्त, दोहन कम


भूजल के अति दोहन से डार्क जोन में रहे भीलवाड़ा शहर में इन दिनों कई बेसमेंट पानी से भरे हैं। स्थिति यह है कि मोटरें लगाकर बेसमेंट से पानी निकलवाना पड़ता है। भीलवाड़ा ऐसा शहर है जहां वर्ष 2000 से 2016 के आखिर तक रोज जलापूर्ति नहीं होती थी। अब दो साल से अच्छी बारिश होने और चंबल का पानी आने से भूजल दोहन कम हो रहा।

यही कारण है कि भूजल स्तर ऊपर आने लगा है। कई कॉलोनियां ऐसी हैं जिनमें बेसमेंट के लिए 15-17 फीट खुदाई पर पानी आ जाता है। इन हालात के चलते कई कॉलोनियों में लोगों की दिनचर्या पर असर आ गया है। लोग देर रात तक व अलसुबह बेसमेंट का पानी निकालने के लिए जगते हैं। कई इलाकों में कॉम्पलैक्स व दुकानों से पानी निकालने के लिए दिन में चार-पांच बार मोटरें चलानी पड़ती हैं। जिले के सभी 12 ब्लॉक डार्क जोन में हैं। यहां 2009 में भूजल स्तर 400 फीट गहरे ट्यूबवैल में भी पानी नहीं आया। जोधपुर में भी इसी तरह की समस्या आ चुकी है।

यहां कुछ साल से भूजल स्तर बढ़ रहा है। कई क्षेत्र में बेसमेंट में रिसाव होने लगा है। एमएस राणावत, एसई, भूजल विभाग

बदली तस्वीर... एक दशक पहले 400 फीट तक पानी नहीं था अब बिना बारिश भी ऐसे हालात

विजयसिंह पथिक नगर... नौ फीट नीचे ही मकान में 2 फीट तक पानी... कई जगह भूजल रिसाव हो रहा है। मकान नंबर डी-8 में शिवप्रसाद सेन ने बताया कि बरसात के सीजन से भूजल की समस्या हुई। हालात ये है कि उनके मकान में 9 फीट नीचे तलघर में दो फीट पानी रोज आ रहा है। 12 घंटे तक मोटर चलानी पड़ती है। इससे बिजली के बिल में 3 हजार रुपए का इजाफा हो गया।

गणेश मंदिर रोड... 5 लाख खर्च में सीमेंट फर्श कराकर रोका रिसाव... गणपति कांप्लैक्स में संजय लढ़ा बेसमेंट में ठेकेदार के साथ आरसीसी करा रहे थे। उन्होंने बताया पिछले साल से ये समस्या प्रारंभ हुई। बेसमेंट में भूजल आने लगा, जो अब बढ़ता जा रहा है। बेसमेंट में 5 से 7 फीट तक पानी भरने से सामान हटाना पड़ा। करीब 5 लाख रुपए की लागत से आरसीसी कराई जा रही है।

विजयसिंह पथिक नगर में एक घर के बेसमेंट से पानी निकालता मकान मालिक।

गांधी नगर... एक घंटे में 400 लीटर पानी आ रहा, बिजली खर्च बढ़ा... अतुल काबरा की दुकान में भूजल रिसाव हो रहा है। काबरा ने बताया कि 8 महीने हो गए रोज 400 लीटर पानी जमीन से निकल रहा है। इसे निकालने के लिए मोटर लगाई गई है। रोजाना पांच यूनिट बिजली खर्च होती है। यहां कई दुकानों पर ऐसे ही हालात है। कुछ दुकानें तो शिफ्ट करनी पड़ गई है।

भूजल बढ़ने के 4 प्रमुख कारण

मेजा बांध नहर... नहर जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। इससे काफी पानी लीकेज हो जाता है। बापूनगर में बाढ़ की स्थिति भी आ चुकी है।

चंबल से जलापूर्ति... चंबल प्रोजेक्ट से शहर को डेढ़ साल से पानी मिल रहा है। अभी रोज वहां से 480 लाख लीटर पानी आने से उपयोगिता बढ़ रही है।

अच्छी बरसात... दो मानसून के दौरान औसत से अच्छी बरसात हुई। 2016 में तो 1000 एमएम पानी गिरा था। जबकि 2017 की बारिश 606 एमएम थी।

भूजल दोहन में कमी... चंबल और मेजा से मिलने वाले पानी से पुराने जल स्त्रोत पर निर्भरता नहीं रही। वर्ष 2008 में भीलवाड़ा में दोहन 116% हो गया था।

3साल में जलस्तर 11.19मीटर बढ़ा

भूजल विभाग के अनुसार 18 अक्टूबर 2017 को बारिश के बाद जलस्तर 7.50 मीटर था। यह पुलिस लाइन के पास से नापा गया था। सेमुमा गर्ल्स कॉलेज कैंपस में डिजिटल रिकॉर्ड मीटर से की गई जांच के अनुसार वर्ष 2014 में जलस्तर 18.69 मीटर था।

शहर की मांग का करीब 90 फीसदी पानी चंबल प्रोजेक्ट से मिलने लगा है

4.25लाख शहर की आबादी

60लाख लीटर पानी मेजाबांध से रोज ले रहे

206डार्क जोन प्रदेश में। 30 ब्लॉक सेफ जोन

550लाख लीटर पानी की रोज मांग

480लाख लीटर पानी चंबल से रोज मिल रहा

भीलवाड़ा में 12ब्लॉक है, सभी डार्क जोन में

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