10 हजार मील दूर यूरोप से पहुंचे 66 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी

Chittorgarh News - भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ सर्दी में देशी-विदेशी पर्यटकों के साथ जिले का प्राकृतिक वातावरण दुर्लभ प्रवासी...

Dec 04, 2019, 12:01 PM IST
भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

सर्दी में देशी-विदेशी पर्यटकों के साथ जिले का प्राकृतिक वातावरण दुर्लभ प्रवासी पक्षियों को भी लुभाता है। इस सीजन में अब तक करीब 60 प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों को देखा जा चुका है। हालांकि इस बार आगमन एक महीने देरी से हुआ।

मानसून में औसत से अधिक बरसात होने से जलाशयों व उनके आसपास सुदूर देशों के प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाला है। संयुक्त राष्ट्र संघ की आनुषांगिक इकाई सदस्य और पर्यावरणविद् डा. मोहम्मद यासीन ने बताया कि गत वर्ष की तुलना में प्रवासी पक्षियों का आगमन एक माह देरी से हुआ है। जिसका मुख्य कारण दैनिक प्रकाश की मात्रा, तापमान व जलवायु परिवर्तन है। इसका एक सीधा प्रभाव इन प्रजातियों के प्रजनन पर भी दिखाई दे रहा है। फिर भी 66 शीतकालीन प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों को देखा गया है। इनमें से कई यूरोप, चीन, बर्मा, अफगानिस्तान आदि देशों से दस हजार मील तक की यात्रा कर यहां आती है। जो कई बातों का सूचक है।

जानिए...जिले में विदेशी पक्षियों के प्रवास के मायने और खासियत

लंबे कद की पक्षी प्रजातियों की संख्या में बढ़ोतरी जैसे के्रन, स्टार्क, व फ्लेमिगों। इसका कारण जिले के कुछ जलाशय बड़े कद के पक्षियों की उड़ान के अनुकूल है। कई संकटग्रस्त प्रजातियों की भी उपस्थिति अभी भी हमारे कई जलाशयों में मानवीय हस्तक्षेप नहीं होने का प्रमाण है। कारण हमारे जलाशयों में प्रचुर मात्रा में भोजन की उपलब्धता तथा सघन वन क्षेत्र के आसपास जलाशयों की उपस्थिति। फायदा - पक्षी परिस्थिति तन्त्र की महत्वपूर्ण कड़ी है, जो खाद्य श्रृंखलाओं को जोड़े हुए हैं। यह कीट, चूहों को खाकर किसान फ्रेंडली भी है। खतरा - जलाशयों से छेड़छाड़, अत्यधिक कीटनाशकों का प्रयोग, विदेशी वानस्पतिक प्रजातियों का फैलाव। प्रमुख प्रवासी पक्षी प्रजातियां - रूढी रोल्ड़क ,डालमिशीयन पेलीकल, वारहेडेड़गुस, ग्रेटर फ्लोमिगों, बाऊन हेडेड गल, ब्लेकिंग स्टील्ट, सेन्ट पाइपर रेडशेंक करल्यू शौवलर पीनटेल, स्टार्क प्रजातियां आदि।


X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना