सहमति से सुलझाए 937 प्रकरण Rs.4.25 करोड़ का अवार्ड भी पारित

Chittorgarh News - भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ शनिवार को जिला मुख्यालय एवं समस्त ताल्लुका मुख्यालयों पर स्थित न्यायालयों में...

Jul 14, 2019, 10:35 AM IST
Rashmi News - rajasthan news 937 cases resolved with consent worth rs425 crores passed
भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

शनिवार को जिला मुख्यालय एवं समस्त ताल्लुका मुख्यालयों पर स्थित न्यायालयों में वृहद स्तर पर राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में दांडिक शमनीय प्रकरण, धारा 138 एन आई एक्ट, बैंक रिकवरी, एमएसीटी, पारिवारिक मामले, सिविल प्रकृति के प्रकरणों का आपसी सहमति के आधार पर कुल 780 प्रकरणों का निस्तारण कर कुल चार करोड 25 लाख 63 हजार 954 रुपए का अवार्ड पारित किया गया।

इसके अतिरिक्त बैंक लोन, पानी, बीएसएनएल से संबंधित कुल 157 प्री-लिटिगेशन आवेदनों का निस्तारण कर 65 लाख 89 हजार 223 रुपए का अवार्ड पारित किया। कुल 937 प्रकरणों का निस्तारण कर चार करोड 91 लाख 53 हजार 177 रुपए का अवार्ड पारित किया गया। इन प्रकरणों को निस्तारित करने में कुल 22 बेंचों ने कार्य किया। इधर राज्य प्राधिकरण के निर्देशानुसार निंबाहेड़ा मार्ग पर नवीन न्यायालय परिसर में पौधरोपण के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत का आगाज हुआ। इसके बाद जिला मुख्यालय पर गठित सभी बेंच का निरीक्षण जिला न्यायाधीश हेमंतकुमार जैन ने किया।

1500 रुपए हर महीने भरण-पोषण का आदेश दिया, बेटे ने मां के पैर छूए अाैर साथ ले गया

राशमी | जाडाना गांव की वृद्धा ज्ञानीबाई के पति भैरूलाल प्रजापत का छह साल पूर्व निधन हो गया था। तीन पुत्रों में से दो प्रभुलाल व बंशीलाल की भी मौत हो गई। तीसरे पुत्र शिक्षक कालूराम के अलगवा के चलते ज्ञानीबाई अपनी एक विधवा बहू के साथ रहने लगी। मनरेगा में मजदूरी कर जीवन यापन करते परेशानी बढ़ गई। उसने पुत्र से भरण पोषण की गुहार करते हुए परिवाद पेश किया। राशमी एसडीएम ने कालूराम को प्रति माह पांच हजार रुपए बतौर भरण पोषण मां को देने का आदेश दिया, लेकिन कालूराम ने इसके विरुद्ध निगरानी एडीजे कोर्ट में पेश कर दी। उसका कहना था कि वह आज तक की राशि मां को अदा कर चुका है। पारिवारिक मामला होने से इसे राष्ट्रीय लोक अदालत में रखा गया। एडीजे व राष्ट्रीय लोक अदालत प्रभारी सुनील कुमार गुप्ता ने मां बेटे के बीच सुलह कराई। बेटे ने कहा कि वह प्रति माह 1500 रुपए बतौर भरण पोषण देगा। मां भी राजी हो गई। बेटे ने कोर्ट में ही मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर दोनों साथ विदा हुए।

पति-प|ी ने फिर पहनाई एक दूसरे को वर माला

लोक अदालत में पारिवारिक न्यायालय के दो दर्जन से अधिक मामले निस्तारित हुए। शहर के छीपा मोहल्ला निवासी 44 वर्षीय नागेंद्र नागर का विवाह 24 जनवरी 1996 को सामूहिक विवाह सम्मेलन में हमीरगढ निवासी रेखा से हुआ था। इनके 22 साल और 14 साल के दो पुत्र हैं। नागेंद्र द्वारा कोर्ट में पेश परिवाद के अनुसार प|ी छोटी-मोटी बातों को लेकर झगड़ा करती है। खर्च वहन को लेकर तकरार के बाद भी वह दांपत्य जीवन के लिए प्रयासरत है। न्यायाधीश शिवकुमार शर्मा ने दोनों को बुलाकर समझाया। आखिरकार पति-प|ी साथ रहने को राजी हो गए। न्यायालय में ही एक-दूसरे को वर माला पहनाई और मिठाई खिलाई। इस दौरान सदस्य राजेंद्रसिंह राठौड़, रीडर अरुणकुमार आचार्य, कनिष्ठ लिपिक गिरिराजप्रसाद मीणा, यशवंतकुमार कुमावत, काउंसलर प्रियंका दाधीच, यास्मीन शेख आदि मौजूद थे। पारिवारिक न्यायालय के कुल 125 प्रकरण रखे गए थे। इसमें 27 में पति-प|ी वापस साथ रहने के लिए तैयार हो गए।

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