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शिक्षा में सुधार और संस्थानों पर नियंत्रण के लिए 2015 में बना काउंसिल कागजों में ही चल रहा है

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 05:57 AM IST

Chittorgarh News - हर महीने चार लाख रुपये सेलरी पर खर्च लेकिन किसी सदस्य ने दौरा ही नहीं किया निखिल शर्मा | उदयपुर प्रदेश के...

Sadas News - rajasthan news council paper made in 2015 for improvement in education and control of institutions is underway
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हर महीने चार लाख रुपये सेलरी पर खर्च लेकिन किसी सदस्य ने दौरा ही नहीं किया

निखिल शर्मा | उदयपुर

प्रदेश के शिक्षण संस्थानों पर नियंत्रण और उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार को लेकर 2015 में बनाया गया स्टेट हायर एजुकेशन कांउसिल सिर्फ कागजों में ही चल रहा है। काउंसिल सदस्यों को हर माह 2 लाख रुपए तनख्वाह दी जा रही है लेकिन सदस्यों ने अब तक न किसी संस्थान का दौरा किया है और न ही उच्च शिक्षा में सुधार या नवाचार के लिए कोई योजना तैयार की है। काउंसिल के गठन से लेकर अबतक तीन उच्च शिक्षामंत्री बन चुके हैं लेकिन किसी मंत्री ने भी इस काउंसिल की सुध लेना जरूरी नहीं समझा। फिलहाल इनका यही काम है कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान यानी रूसा के तहत मिलने वाले पैसे को ग्रांट के रूप में कहां और किस तरह बांटा जाए। काउंसिल की सिर्फ दो बैठकें ही हुई हैं।

चेयरमैन-वाइस चेयरमैन सहित 27 सदस्य: केंद्र सरकार की रूसा योजना आने के बाद प्रदेश में इस काउंसिल का गठन 8 जुलाई 2015 को हुआ। काउंसिल के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन सहित 27 सदस्यों को इसमें शामिल किया गया। जब काउंसिल के आदेश हुए तब प्रदेश के उच्च शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ थे। अक्टूबर 2016 में काउंसिल के सदस्यों के लिए सेवा नियम तय करने के बाद काउंसिल को मंजूरी दी गई। अक्टूबर 2017 में किरण माहेश्वरी के उच्च शिक्षामंत्री रहते काउंसिल के वाइस चेयरमैन सहित अन्य पदों पर सदस्यों को नियुक्त किया गया।

यह है काउंसिल का प्रारूप, उच्च शिक्षा मंत्री होते हैं चेयरमैन: चेयरमैन उच्च शिक्षा मंत्री को बनाया जाता है, फिलहाल उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी काउंसिल के चेयरमैन हैं। प्रोफेसर रैंक के प्रबंधन क्षमता में माहिर शिक्षाविद को वाइस चेयरमैन बनाया गया। उच्च शिक्षा, वित्त और नियोजन से जुड़े प्रमुख शासन सचिवों को सदस्य बनाया गया। कई विवि के कुलपति भी इस काउंसिल का हिस्सा हैं। प्रोफेसर रैंक के एक शिक्षाविद् को मेम्बर सेक्रेटरी बनाया गया है। वाइस चेयरमैन और मेम्बर सेक्रेटरी की तनख्वाह एक कुलपति और प्रोफेसर के बराबर है। अक्टूबर 2017 से लगभग 2-2 लाख रुपए प्रतिमाह इन सदस्यों को सरकार दे रही है।


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