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पहली बार 2 आईएएस, 9 जज, 2 एएसपी समेत 4 आरपीएस, आबकारी वन, रसद जैसे 8 विभाग और 53 % पंचायतों की मुखिया हैं महिलाएं

एक वर्ष पहले
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इन विभागों/ संस्थानों की कमान महिलाओं के हाथ

जिला आबकारी अधिकारी भी महिला

वर्ष 2020 का महिला दिवस जिले की महिलाओं के लिए वाकई गर्व और प्रेरणादायक है। रानी पदमिनी, भक्तिमती मीरा और स्वामीभक्त पन्नाधाय की धरा पर सदियों बाद महिलाएं राज-काज में भी इतनी आगे आ गई कि कहीं कहीं तो पुरुष प्रधान समाज का जुमला ही खत्म हो गया। जैसा कि हाल में गठित पंचायतीराज। जहां 53 प्रतिशत सरपंच महिलाएं है। क्योंकि 21 पंचायतों मेंं वह पुरुषों को हराकर भी इस पद पर आ गई। प्रशासन की बात करें तो इस समय 2 आईएएस, 4 आरपीएस, 1 आईएफएस और एक आरएएस अधिकारी महिला है। नौ अदालतों मेंं महिला जज है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दैनिक भास्कर बता रहा है कि जिले में पहली बार महिलाएं ऐसी ऐसी जगह और पदों पर भी काम कर रही है, जो अब तक उनसे अनछुए रहे। राजनीति, प्रशासन, पुिलस, शिक्षा, बैंक और व्यवसाय जैसे कई क्षेत्रों में अग्रिम भूमिका में है ही। वन्यजीव, आबकारी और रसद जैसे विभागों को भी महिलाएं चला रही है। बतौर एसडीएम अंशुल आमेरिया और डीएसपी अदिति चौधरी भदेसर उपखंड क्षेत्र का प्रशासन और कानून व्यवस्था महिलाओं के जिम्मे ही है।

प्रशासन, पुलिस और न्याय क्षेत्र में अग्रणी महिलाएं

{2 आईएएस : जिला परिषद सीईओ नम्रता वृष्णि और चित्तौड़गढ़ एसडीएम तेजस्वी राणा। {4 अारपीएस : चित्तौड़गढ़ में सरिता सिंह और रावतभाटा में तृप्ति विजयवर्गीय एएसपी,चित्तौड़गढ़ में शाहना खानम और भदेसर में आदिति चौधरी डीएसपी। {9 न्यायिक अधिकारी : एमएसीटी कोर्ट शिवानी जौहरी भटनागर, पॉक्साे एक्ट मनीषासिंह, एनडीपीएस द्वितीय, मीनाक्षी शर्मा, एसीजेएम वन नम्रता पारीक, न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीता प्रकाश, एनआई एक्ट न्यायाधीश भारती पंवार, निंबाहेड़ा एसीजेएम वन सीमा ढाका,कपासन एसीजेएम ममता मेनारिया और बड़ीसादड़ी सीजेएम आशा चौहान

विपरीत हालात में भी अपने हौसले और जज्बे के बूते लक्ष्य को हासिल किया, आज बन गईं हैं आदर्श

{ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज: आईएएस नम्रता वृष्णि {वन्यजीव विभाग: उपवन संरक्षक आईएफएस सविता दहिया

{नागरिक आपूर्ति विभाग: डीएसओ बीजल सुराणा {आबकारी विभाग: जिला आबकारी अधिकारी रेखा माथुर

{नगर परिषद: आयुक्त दुर्गाकुमारी नगर परिषद चित्तौड़गढ़ {शिक्षा विभाग: कल्याणी दीक्षित जिला शिक्षा अधिकारी

{सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता: ललिता खींची, सहायक निदेशक {सूचना एवं जनसंपर्क विभाग: ऋतु सोढी

{पंचायत समिति कपासन: बीडीओ कुमुद सोलंकी {बाल कल्याण समिति: अध्यक्ष डा. सुशीला लडढा

{अरबन कोऑपरेटिव बैंक: अध्यक्ष विमला सेठिया, एमडी वंदना वजीरानी। {नेहरू युवा केंद्र: समन्वयक, नीतू चौहान

{डीएसओ बीजल सहित महिला टीम ही चला रही जिले का रसद और नागरिक आपूर्ति विभाग... लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा के प्रति जवाबदेह रसद विभाग की कमान भी महिला अधिकारियों के हाथ है। डीएसओ बीजल सुराणा के साथ दो प्रवर्तन निरीक्षक पिंकी स्वर्णकार व ज्योति खटीक हैं, इसी से जुड़े खाद्य नागरिक एवं आपूर्ति विभाग की महाप्रबंधक अल्पी शर्मा हैं। वर्तमान में राज्य के तीन जिलों में ही महिला डीएसओ हैं। वनस्थली विद्यापीठ की छात्रा रहीं बीजल सुराणा ने दिल्ली से एमबीए करने के बाद गुडगांव और फ्रांस से पीजी किया। डीएलओ होते हुए आज भी इग्नू से पर्यावरण क्षेत्र में डिप्लोमा कर रही हैं। यूनाइटेड नेशन से पब्लिक पाॅलिसी कोर्स करने का लक्ष्य है। व्यवसायिक परिवार की बीजल दो बार आईएएस के प्रयास और प्राइवेट जॉब के बाद इस फील्ड में आईं।

{किले पर 200 फोटोग्राफरों मेंं एक मात्र महिला पूनम, कैमरा चलाकर बनी परिवार का संबल...किले पर पहली बार एक युवती भी पर्यटकों के फोटो खींचती नजर आने लगी है। यहां औसत 200 लोग फोटोग्राफी से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इसमें पहली बार 21 वर्षीय पूनम तेली के रूप में एक महिला भी शामिल हुई हैं। पूनम के पिता रतनलाल मजदूरी करते हैं। मां गीतादेवी फतहप्रकाश महल प्रांगण में चाय की थड़ी लगाती है। पूनम प्रतिदिन घर के काम व पढ़ाई के साथ फोटोग्राफी भी करने लगी। चूंकि कैमरा खरीदने के पैसे नहीं हैं इसलिए रोज 150 रुपए किराए पर कैमरा लाती हैं। किले पर लोागों को पर्यटकों की गाइडिंग व फोटोग्राफी करते देख डेढ़ साल पहले वह फोटोग्राफी करने लगी। 12वीं की प्राइवेट पढ़ाई कर रही है।

{पहले पति, फिर ससुर की मौत के बाद भी नहीं घबराई, बच्चों के साथ बिजनेस को भी आगे बढ़ाया... जीवन की विकट परिस्थितियों में टूटने की बजाय सामना किया जाना चाहिए। शहर की एक महिला व्यवसायी 46 वर्षीय रेखा मालू इसका उदाहरण हैं। जो बूंदी बाइपास मार्ग पर चाय कंपनी का संचालन कर रही हैं। करीब सात साल पहले पति अरविंद की कैंसर से मृत्यु हो गई। तब बेटा केशव 14 साल का और बेटी वृंदा 8 साल की थी। पति के इलाज के दौरान हीं दोनों बच्चों की परवरिश के साथ बिजनेस से भी जुड़कर ससुर के लिए संबल बन गई रेखा। गत दिसंबर मेंं ससुर राधेश्याम का भी निधन हो गया। अब बतौर डायरेक्टर कंपनी की पूरी कमान रेखा के पास है। उनका सहयोग कर रहे बेटे केशव का कहना है कि पिता के आकस्मिक निधन के बाद दादा व्यवसाय को लेकर बहुत चिंतित थे, लेकिन मां ने भरोसा दिलाया कि व्यवसाय को आगे बढाएंगे। ताऊ पंकज का भी पूरा सहयोग मिलता है।

{सिर्फ दो जिलों में महिला आबकारी अधिकारी, इनमें से एक चित्तौड़गढ़ में यहीं की बहू रेखा माथुर...राजस्थान में आबकारी विभाग सरकारी खजाने का सबसे बड़ा स्त्रोत है तो कई शराब कारोबारियों व ठेकेदारों से जुड़ा होने के कारण चुनौतियों वाला महकमा भी है। इसलिए यह महिला अधिकारियों के लिए कभी मुफीद या रुचिकर नहीं माना गया। राज्य मेंं अभी मात्र दो ही जिलों में इसकी कमान महिलाओं के हाथ है। जिसमें से एक चित्तौड़गढ़ है। यहां की अधिकारी रेखा माथुर डेढ़ साल बाद रिटायर भी हो जाएंगी। संयोग है कि उनका विवाह 25 साल पहले चित्तौड़गढ़ में ही हुआ था। बीकानेर निवासी रेखा का 1985 में तहसीलदार सेवा में चयन हुआ। इस बीच 1988 में बहू बनकर चित्तौड़ आ गईं तो सैनिक स्कूल मेंं टीचर बन गईं। वर्ष 1991 से 1996 तक टीचिंग की। आरएएस एलाइड में सफलता मिली तो आबकारी विभाग मिला। एकबारगी नाम सुनकर नर्वस हुईं, लेकिन पति सहित परिवारजनों ने प्रोत्साहित किया कि नौकरी करनी चाहिए।
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