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पहली बार पांच साल में 15 वार्ड बढ़ाए गए, इसलिए अब पहले से कम 1600 मतदाताओं पर ही होगा एक पार्षद

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:50 AM IST

Chittorgarh News - 1 जनसंख्या अनुपात 10 प्रतिशत से कम ज्यादा नहीं होगा : वार्ड पुनर्गठन में जनसंख्या अनुपात समान रहेगा। यह 10 प्रतिशत से...

Chittorgarh News - rajasthan news for the first time in 15 years 15 wards were increased so now at least 1600 voters will have a councilor
1 जनसंख्या अनुपात 10 प्रतिशत से कम ज्यादा नहीं होगा : वार्ड पुनर्गठन में जनसंख्या अनुपात समान रहेगा। यह 10 प्रतिशत से कम या ज्यादा नहीं होना चाहिए। यानी यदि औसत 1600 वोटर प्रति वार्ड है तो किसी भी वार्ड में यह संख्या इससे 10 प्रतिशत कम या अधिक ही हो सकती है। सीमा निर्धारण सड़क या फिर गली के आधार पर किया जाएगा। अगर वार्ड का साइज बिगड़ता है तो वार्ड गठन में काल्पनिक रेखा रखी जा सकेगी। एक मकान को दो वार्डों में विभाजित नहीं किया जा सकेगा।

ज्यादा आबादी व फैलाव वाले वार्ड टूटेंगे... वार्डों के पुनर्गठन और परिसीमन में पुराने वार्ड और आसपास की बढ़ी 10 फीसदी आबादी ही शामिल की जाएगी। जहां पूर्व में आबादी कम थी और अब ज्यादा हो गई। ऐसे वार्ड फोकस में रहेंगे। शहर के सेंती-मधुवन, चामटीखेड़ा-सेतु मार्ग, संगम मार्ग, महेश नगर आदि क्षेत्र के कुछ वार्ड में वोटर्स 2000 या उससे ज्यादा हो गए। नई कालोनियां विकसित होने से वार्डों का फैलाव बढ़ गया।

इन आंकड़ों का मतलब: नगर परिषद चुनाव में बढ़ जाते है फर्जी वोटर?

नवंबर में होने वाले नगर परिषद चुनाव में शहर में कितने वोटर्स होंगे। इसका अनुमान लगाने के लिए भास्कर ने पिछले तीन चुनावों के आंकडे खंगाले। लोस चुनाव में शहर में 90375 मतदाता और इसके चार महीने पहले दिसंबर के विस चुनाव में यह संख्या 87568 थी। अब आगामी नप चुनाव में मतदाताओं की संख्या अधिकतम 93-94 हजार तक होनी चाहिए। 60 वार्ड होने पर प्रत्येक वार्ड औसत 1600 मतदाताओं का होगा। गत चुनाव नवंबर 2014 में यह औसत 1900 मतदाता था। क्योंकि तब कुल 87179 मतदाता थे। हैरत की बात यह कि इसके करीब साढ़े चार साल बाद हुए विस चुनाव 2018 में मतदाता संख्या लगभग इतनी ही थी। इसका एक मतलब नप चुनाव के समय काफी अधिक फर्जी वोटर्स जुड़ गए थे, जो बाद में कटते गए। यदि ऐसा ही इस बार भी हुआ तो प्रत्येक वार्ड में औसत मतदाता 1600 से ज्यादा भी हो सकते हैं।



भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

शहर की नगर परिषद सहित जिले की निम्बाहेड़ा और रावतभाटा नगरपालिका के आम चुनाव इस साल नवंबर में होने हैं। राज्य सरकार द्वारा वार्ड पुनर्गठन की अधिसूचना जारी करने के साथ ही सियासी सरगर्मी भी समय से पहले शुरू होने के आसार बन गए। इसका मुख्य कारण वार्डों की संख्या बढ़ना है। पहली बार है कि चित्तौड़गढ़ शहर में पांच साल में ही 15 वार्ड बढ़ गए। शहर की भौगोलिक सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है पर एकाएक इतने वार्ड बढ़ने से अब पार्षद के लिए अपने इलाके में घूमना आसान होगा। उनके वोटर्स की संख्या भी पहले की तुलना में कम हो जाएगी। मतदाताओं के ताजा आंकडे के आधार पर इस बार औसत 1600 वोटर्स पर एक पार्षद होगा। जबकि पिछली बार यह अनुपात लगभग 1900 मतदाता था।

राज्य सरकार की अधिसूचना अनुसार चित्तौड़गढ़ नगर परिषद इस बार 61 सदस्यीय बोर्ड होगा। इसमें 60 वार्ड पार्षद और एक सभापति होगा। जिसे सीधे जनता ही चुनेगी। पिछले चुनाव 2014 में 45 वार्ड के साथ बोर्ड भी 45 सदस्यीय ही था। क्योंकि सभापति पार्षदों के बीच से ही चुना गया था। सरकार ने अभी नगर परिषद सीमा विस्तार के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में एक साथ इतने पार्षद बढ़ने से उनका एरिया और वोटर्स की संख्या दोनों ही गत चुनाव के मुकाबले कम हो जाएंगे।

2 एक वार्ड दो थानों में नहीं : एक वार्ड 2 थानों या 2 विधानसभा में नहीं बंटेगा। एक सीमा में होगा। यही बात एसडीएम, एडीएम, पीएचईडी, पीडब्ल्यूडी, विद्युत निगम अभियंता कार्यालय, नगरपरिषद व यूआईटी जोन के बतौर भी देखी जाएगी। वार्डों की नंबरिंग शहर के उत्तर पश्चिमी कोने से एंटी क्लॉकवाइज चक्रीय क्रम में की जाएगी।

3 सीमा निर्धारण के साथ ही मतदाता सूची बनेगी: वार्डों के पुनर्गठन के साथ ही प्रारंभिक मतदाता सूचियां तैयार कर ली जाएंगी। ताकि वार्ड गठन को अंतिम रूप देने के बाद मतदाता सूची बनाने का काम दोबारा नहीं करना पड़े। इसके लिए पुनर्सीमांकन प्रक्रिया में शहरी सीमा और क्षेत्र की जानकारी रखने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

10 साल में 10 वार्ड ही बढ़े थे, अब 5 साल में ही 15 बढ़ा दिए... चित्तौड में लंबे अंतराल के बाद वर्ष 1994 में नगर पालिका चुनाव हुआ था। तब शहर में कुल 35 वार्ड थे। जो बढ़कर क्रमश 40, 45 और अब सीधे 60 हो गए। किसी भी व्यक्ति या कार्यकर्ता के लिए वार्ड चुनाव राजनीति में कदम बढ़ाने या स्थापित होने की अहम सीढी होती है। एकदम इतने वार्ड बढ़ने से नए लोग राजनीति में आ सकेंगे।

1935 के मेवाड़ स्टेट की नगर पालिका, 2012 में बनी नगर परिषद... चित्तौड़गढ़ में नगर पालिका की स्थापना तो 1935 में मेवाड़ स्टेट के समय ही हो गई थी। हालांकि पहला चुनाव आजादी के बाद 1952 में हुआ। गौरीशंकर दशोरा प्रथम चेयरमैन बने। पूरे 60 साल तक नगर पालिका रहने के बाद 2012 में सरकार ने इसे नगर परिषद का दर्जा दिया।

पुनर्गठन को लेकर चर्चा करते आयुक्त।

पुनर्सीमांकन प्रक्रिया






पुनर्सीमांकन का काम शुरू, कमेटी बना दी है


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