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गोमुत्र से बुद्धि होती है सात्विक: संत जगदीशगोपाल
लक्ष्मी वाटिका में एक दिवसीय गौ कथा में संत गोपालानंद सरस्वती (जगदीश गोपाल महाराज) ने कहा कि गाेमाता को कभी पहली रोटी नहीं जिमानी चाहिए क्योंकि पहली रोटी शास्त्रोक्त भी सही नहीं होती है और ना ही सही बन पाती है। गाेमाता को स्वयं भोजन करने से पूर्व सबसे अच्छी रोटी पर घी और गुड़ लगाकर थाली में रखकर व्यवस्थित जिमानी चाहिए।
संतश्री ने बताया कि यहां रोटी का सवाल नहीं है बात श्रद्धा की है। उनके प्रति श्रद्धा होगी तब ही गाेसेवा का फल मिल पाएगा। भगवान राम की अनुपस्थिति में भरत ने गोमुत्र में भीगे हुए जौ का सेवन कर अयोध्या के शासन को संभाला था। गोमुत्र सेवन से बुद्धि सात्विक रहती है। विद्यार्थी जीवन में धैर्य अतिआवश्यक है और गौ सेवा व गौ कृपा के बिना धैर्य की प्राप्ति नहीं हो सकती। अग्निपुराण के अनुसार गायत्री मंत्र के साथ गाेमाता के दूध से बनी खीर से आहुति देने से विद्यार्थी को श्रेष्ठ विद्या की प्राप्ति होती है।
प्रसवमुखी गाेमाता की परिक्रमा करने से पृथ्वी की सप्तद्वितिय परिक्रमा का फल मिलता है। शंकर जाट ने बताया कि गांव पहुंचने पर यात्रा का स्वागत किया गया। जवाहरनगर आदि मुख्य स्थानों पर फूलों से स्वागत किया। इसके बाद संतश्री ने कृष्ण महावीर गोपाल गाेशाला का निरीक्षण कर गाेमाता काे लापसी जिमाई। इसके बाद यात्रा को कथा स्थल पर लाया गया। कथा के दौरान आकोला गाेशाला पर टीनशेड के लिए सहयोग राशि 54 हजार नकद व 3 लाख रुपए की घोषणा हुई।