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पढ़ाई में सामान्य बच्चों से आगे ये दिव्यांग, खेल और रोजगार से बता रहे-हम किसी से कम नहीं

Chittorgarh News - भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है। बल्कि चुनौतियों से लड़ने और आगे बढ़ने की ताकत है।...

Dec 04, 2019, 09:30 AM IST
भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है। बल्कि चुनौतियों से लड़ने और आगे बढ़ने की ताकत है। दिव्यांग बच्चों की ऐसी ही प्रतिभाओं और हौसले की कहानियां मंगलवार को विश्व दिव्यांग दिवस पर आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में सामने आई। समसा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कलेक्टर चेतन देवड़ा भी यह सब देख और सुनकर प्रभावित हुए। उनको और आगे बढ़ने के टिप्स भी दिए तो हौसलों में उड़ान भी भरी। प्रतियोगिता में ऐसे बच्चे भी शामिल थे जो सामान्य बच्चों के साथ पढ़ते हुए भी उनसे अधिक अंक व ए ग्रेड से पास हो रहे। कुछ दिव्यांग युवाओं का दल रोजगार से भी जुड़ गया।

हौसले की कहानी सुनीं तो कलेक्टर बोले-आप तकलीफ सहन कर लोगे, ईश्वर ने इसी भरोसे सौंपी ये चुनौती

कलेक्टर देवड़ा दिव्यांग बालकों को हौसला देते हुए बोले कि तुम ईश्वर के सबसे प्यारे हो। इसलिए मानकर चलो कि किसी से कमजोर नहीं हो। उसे भरोसा था कि आप तकलीफ सहन कर लाेगे एवं सामान्य बच्चों से भी बहुत कुछ अधिक कर दिखाओंगे। आपने अब तक जो सपने बुने हैं। उनको पूरा करे, आगे बढे, कभी हिम्मत नहीं हारे।

अपने हाथ से खुद की चोटी नहीं बना सकती पर पढ़ाई में सामान्य बच्चों से आगे मजदूर की बेटी

जवासिया निवासी कस्तूरबा आवासीय स्कूल गंगरार में आठवीं की छात्रा जूली खटीक के जन्म से एक हाथ नहीं है। माता-पिता मजदूरी करते हैं पर उसका सपना बड़ा अधिकारी बनने का। सामान्य बच्चों के साथ सातवीं में पढ़ाई करते हुए 85 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। अपनी चोटी भी खुद नहीं बना पाती है पर सहपाठी छात्राओं के सहयोग से हिम्मत नहीं खोई। समसा के हेमेंद्र सोनी ने बताया कि वह सामूहिक गान एवं चित्रकला में प्रथम रही। हाल में उसके एक कृत्रिम हाथ लगाया गया।

अनुपयोगी कपड़ों को रोजगार का जरिया बनाया, इनके बनाए दो बैग कलेक्टर ने खरीद कर उत्साह बढ़ाया... जिलास्तरीय इवेंट में युवा दिव्यांजनों द्वारा निर्मित बैग, मसाले एवं आर्टिफिशियल ज्वैलरी की प्रदर्शनी भी संदेश दे रही थीं। मेवाड़ विकलांग सेवा संस्था के संरक्षक पूरण शर्मा, अध्यक्ष प्रीती तनेजा ने बताया कि दिव्यांगजनों को स्वावलंबी बनाने के लिए यह संगठन बनाया। कट्स मानव विकास केंद्र के सहयोग से विशेष ट्रेनिंग दी गई। अब सभी वेस्ट कपड़ों से बैग बनाने, आर्टिफिशियल ज्वैलरी एवं मसाले तैयार कर रोजगार से जुड़े है। कलेक्टर चेतन देवड़ा ने प्रदर्शनी में तीन सौ रुपए से दो बैग खरीकर इनको प्रोत्साहित किया।

खिलाड़ियों को सम्मानित करते कलेक्टर व अन्य अतिथि।

दूर की चीज दिखाई नहीं देती, डेजी प्लेयर डिवाइस से पढ़ते हुए आठवीं में ए ग्रेड से पास हुआ कन्हैया

राउमावि नेतावल महाराज में कक्षा नौवीं के छात्र कन्हैयालाल रैगर आठवीं बोर्ड में ए ग्रेड से उत्तीर्ण हुआ। फार्सले ब्लाइंड कन्हैया डेजी प्लेयर डिवाइस यानी ओडियो सुनकर पढ़ाई करता है। बड़ा आदमी बनकर देश सेवा करने का सपना ळै। समसा के सहायक परियोजना समन्वयक राजेंद्र शर्मा एवं शैतान सिंह के अनुसार इस छात्र ने यहां रस्साकसी एवं प्रश्नोत्तरी में प्रथम स्थान पाया। कलेक्टर चेतन देवड़ा ने ट्राफी दी।

बचपन में रोशनी चली गई... हौसला ऐसा कि राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेला

राष्ट्रीय दिव्यांगजन टीम में शामिल निम्बाहेड़ा का साेनू मेघवाल जब 8 साल का था। स्कूल में बच्चों के झगड़े में ऐसी चोट लगी कि आंखों की रोशनी चली गई। पिता का साया पहले ही उठ चुका था। मां एवं बहन भी दिव्यांग है। इसके बाद भी हार नहीं मानी। पढ़ाई के साथ उदयपुर में सामान्य बच्चों के संग क्रिकेट खेला तो इस खेल में रूचि बढ़ गई। शिक्षा विभाग एवं कट्स संस्था के सहयोग से अन्य जिलों में दिव्यांगजन खेलकूद में जाने लगा। अब तक लखनऊ, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में खेल चुका।

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