- Hindi News
- National
- Kapasan News Rajasthan News In Mewar In The Name Of Holi Areas Like Holithada And Holi Mangra Used To Climb The Palace Havelis Such Strong Colors Which Have Not Yet Come Down
मेवाड़ में होली के नाम पर होलीथड़ा और होली मंगरा जैसे इलाके महल-हवेलियों पर चढ़ते थे ऐसे पक्के रंग जो अब तक नहीं उतरे
सोमवार को होली और मंगलवार को धुलंडी के साथ मेवाड़ में होली पर्व श्रृंखला शुरू हो जाएगी। जो चित्तौड़गढ़ की रंग तेरस के साथ संपन्न होगी। मेवाड़ में होली से जुड़ी कई चीजें खास है। जो इसकी अलग पहचान भी बनाती है।
जिले के ही आकोला निवासी इतिहासविद डा श्रीकृष्ण जुगनू का कहना है कि मेवाड़ का होली से इतना गहरा रिश्ता है कि रावली होली, बडी होली मोहल्ला, होली मगरा आदि जगह है। गांव नगर में होली की ठाण नाम से मोहल्लों की पहचान बन गई। जैसे निम्बाहेड़ा में होलीथडा। उदयपुर सिटी पैलेस में राणा स्वरूपसिंह के घोड़ों पर होली खेलने से लेकर गुलाल, अबीर, पानी के घोल, गेर व पत्थरमार होली खेलने के जैसे कई रूप हैं। रंगों के बिना होली अधूरी है और मेवाड़ के रजवाड़े चटक रंगों को खास अहमियत देते थे। चित्तौड़ दुर्ग पर पत्ता हवेली और रतनसिंह महल भले ही अब खंडहर हो गए पर इनकी दीवारों और गोखड़ों पर चढ़े पक्के रंग आज सदियों बाद भी नहीं मिट पाए।
बस्सी में आग के गोलों के साथ तो घोसुंडा में खोपड़ाफाड खेलते थे होली
जिले के बस्सी और घोसुंडा में भी कुछ अलग परंपरा रही है। बस्सी में 60 साल पहले तक भी बांस में बारूद भरकर आग के गाेले के साथ होली खेलते थे। घोसुंडा में 40-45 साल पहले खोपड़ा फाड़ होली की अपनी पहचान थी। हालांकि सुरक्षा और समय के साथ ये परंपराएं अब नहीं रही। गेर भी अब नाथद्वारा, कांकरोली, मेनार, मांडल, चित्तौड़ के किले और उदयपुर में पानेरियों की मादडी जैसे कुछ स्थानों पर सिमट गया है।
रंग तेरस रविवार को, इसलिए 16 को शीतला अष्टमी पर हेगा अवकाश
जिले में कलेक्टर चेतन देवड़ा की ओर से घोषित किए गए दो स्थानीय अवकाश में से एक रंग तेरस होता है। कपासन उपखंड क्षेत्र में इसकी जगह शीतला अष्टमी पर होता है। इस बार रंग तेरस रविवार 22 मार्च को है। इसलिए कलेक्टर ने 16 मार्च सोमवार को शीतला अष्टमी पर ही पूरे जिले में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। दूसरा अवकाश हरियाली अमावस्या 20 जुलाई सोमवार को रहेगा।