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हार्ट अटैक से ज्वैलर की मौत, पत्नी बोली : तंत्र-मंत्र से जिंदा कर दूंगी
शाम 4 बजे हो सका अंतिम संस्कार
यह अंधविश्वास की कहानी है। जिसने पूरे शहर को सकते में डाल दिया। रामलीला मैदान में हार्ट अटैक से एक ज्वैलर की मौत के बाद प|ी शव चार घंटे तक कमरे में लेकर बैठी रही और दावा करती रही कि तंत्र-मंत्र के दम पर वह उसे चार बजे तक जिंदा कर देगी। पूरा परिवार, पुलिस और शहर के लोग महिला के पति को जिंदा होता देखने के लिए जुटे रहे। शाम चार बजे तक वह जिंदा नहीं हुआ तो घरवालों ने शाम को दाह संस्कार कर दिया।
हालांकि पुलिस और कुछ लोगों ने महिला को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे प|ी की जीद के आगे कुछ नहीं कर सके। हैरानी यह है कि इसमें महिला के बेटे ने भी उसका साथ दिया। प|ी आठवीं पास है और बेटा बीसीए नर्सिंग किए हुए हैं। इसके बाद भी अंधविश्वास हावी रहा। 50 साल के सुभाष सोनी घंटाघर के पास गुलजार मंजिल में ज्वैलर की दुकान चलाते थे। वे सुबह छह घंटे दुकान के लिए घर से रवाना हो गए। इस दौरान उन्हें हार्ट अटैक आ गया। परिजन उन्हें एसके अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित करा दिया। परिजन बिना पोस्टमार्टम के शव घर ले आए। परिजनों ने प|ी सुमित्रा को पति की मौत की जानकारी दी। गई और परिजनों से कहा कि अपने पति को तंत्र-मंत्र करके जिंदा कर देगी। इसके लिए उसे शाम चार बजे तक का वक्त चाहिए। परिजनाें ने बताया कि नाै साल पहले सुमित्रा की बेटी गुड्डी काे स्कूल जाते समय ट्रैक्टर ने कुचल दिया था। उसकी माैत के बाद से वह सदमे में थी अाैर पूजा पाठ में लगी रहती थी। इधर, पति सुभाष की माैत पर भी उसकी अांख से एक आसु नहीं निकला अाैर वह गुमसुम उसके शव के पास बैठी रही। धर्माणा चाैकी इंचार्ज भाेपाल सिंह ने बताया कि महिला द्वारा शव नहीं सौंपने की सूचना मिली ताे समझाइश करने पुलिस पर माैके पर गई थी।
पुलिस और परिजनों किसी की भी नहीं सुनी
परिजनों व समाज के लोगों ने महिला को खूब समझाने की कोशिश की। लेकिन, प|ी नहीं मानी। वह कमरे से बाहर तो निकली, लेकिन अपने बेटे और सास को भी कमरे में साथ ले गई। सूचना पर पुलिस भी पहुंची। उनकी समझाइश का भी कोई असर नहीं हुआ। पुलिस व लोगों ने सुमित्रा के बेटे को भी समझाया, लेकिन बेटे ने कहा कि मां को चार बजे तक का वक्त मिलना चाहिए। इससे उन्हें आत्मसंतुष्टि हो जाएगी। शाम चार बजे तक मां, बेटा और सांस शव को लेकर बैठे रहे। हालांकि इस दौरान तंत्र-मंत्र की कोई सामग्री इस्तेमाल नहीं की गई।