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3 हजार विदेशियों के 100 ग्रुप की भी ना, शाही ट्रेन के शेष सातों फेरे निरस्त
विश्व धरोहर चित्तौड़ दुर्ग के पर्यटन पर भी कोरोना वायरस का साइड इफेक्ट आ गया है। पिछले एक पखवाड़े में पर्यटन व्यवसाय 30 से 40 प्रतिशत गिर गया है। विदेशी पर्यटकों के वीजा निरस्त करने के साथ ही घूमने को लेकर जारी एडवाइजरी से अप्रैल तक चलने वाला सीजन मार्च शुरू में ही दम तोड़ रहा है। अंदाजा इसी से लगा ले कि 7 ट्रेवल कपंनियों से 25 मार्च तक यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों के 100 ग्रुप अब नहीं आ रहे। अप्रैल तक देशी पर्यटकों के जिन 125 ग्रुप की एडवांस बुकिंग थी, उनकी भी ना आ गई। इन ग्रुप्स बुकिंग में क्रमश: 5 और तीन हजार पर्यटक यहां आते। शाही ट्रेन के बचे हुए सातों फेरे भी निरस्त हो ही गए, जिनमें करीब 140 विदेशी पर्यटक शामिल थे। बिना ज्यादा एडवांस बुकिंग भी बड़ी संख्या में पर्यटक आते है। उनमें भी भारी गिरावट आ रही है।
ग्रुप बुकिंग कराने वाली ट्रेवल कंपनियों ने यहां गाइड, होटलों को मैसेज भेज दिए हैं अब ये किला देखने नहीं आ रहे हैं। इन ग्रुप में पांच हजार देशी व करीब तीन हजार विदेशी पर्यटकों के नहीं आने से यहां के पर्यटन व्यवसाय को प्रतिदिन औसत छह लाख का नुकसान है। कोरोना वायरस को महामारी घोषित करने के साथ ही पर्यटक और इस बिजनेस से जुडे लोग भी भयभीत है। फोटोग्राफर, गाइड, आटोरिक्शा, होटल, रेस्तरा, हैंडीक्राफ्ट आदि से जुड़े लोगों का धंधा मंद हो गया। केंद्र सरकार ने विदेशी पर्यटकों के 13 मार्च से लेकर 15 अप्रैल तक के वीजा सस्पेंड कर दिए हैं। इससे चित्तौड़ आने वाले पर्यटकों के कदम भी रुक गए। दुर्ग फोटोग्राफर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संजय शर्मा कहते है कि जो पर्यटक पहले से भारत भ्रमण करते हुए यहां आ रहे है वे भी फटाफट देखकर रवानगी ले रहे हैं। अधिकृत गाइड, टूर आपरेटर और होटल प्रबंधकों के अनुसार दो दिन से लगातार बुकिंग कैंसिल होने के ही फोन आ रहे हैं। अप्रैल तक आने वाले जो 125 देशी ग्रुप की ना हुई, उनमें देश की सबसे बड़ी टूरिस्ट ट्रैवल कंपनियों वीणा और केसरी शामिल हैं।