- Hindi News
- National
- Kapasan News Rajasthan News Opium Standing In 1197 Hectare Shocked The Plant Is Not Growing So Long Barricades To Save
1197 हैक्टेर में खड़ी अफीम ने चौकाया, पौधे इतने लंबे कि भार नहीं झेल रहा तना, बचाने को बेरिकेड्स
{15436 किसानों के खेतों में नपती हो रही, चिराई-लिवाई शुरू: चित्तौड़गढ जिले में केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग के तीनों खंड क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय से इस बार 15436 किसानों को अलग अलग आरी के पट्टे जारी हुए थे। जिसमें 1196.87 हेक्टेयर क्षेत्र में अफीम की बुआई हुई। इस बार पांच, छह, दस और 12 आरी के पट्टे दिए गए हैं। फसल तैयार होने के साथ अब विभाग की टीमें खेत दर खेत पहुंच कर जांच नपती कर रही है। जिले के कई खेतों में किसानों ने डोडों की चिराई कर लिवाई यानी अफीम निकालना भी शुरू कर दिया है।
अफीम खेतों में इस बार आखिरी समय में आए एक चौकाने वाले बदलाव ने किसानों को परेशानी में डाल दिया। पौधे इतने लंबे हो गए कि डोडे आने के बाद तना भार नहीं झेल पाया और फसल बिना तेज हवा के ही आडी पड़ने लगी। किसान अब पूरे खेत में रस्सियां बांधकर पौधों को सहारा दे रहे हैं, ताकि फसल के साथ पट्टा भी बच सके। इस बार जिले में करीब 1197 हैक्टेयर में अफीम की फसल है। हालांकि यह समस्या सभी जगह नहीं है। कई किसानों ने अफीम की चिराई-लुवाई भी शुरू कर दी है।
क्षेत्र के अफीम किसान पहली बार एक नई समस्या से रूबरू हुए। उनकी कमर या कंधों तक लंबे होने वाले अफीम के पौधे इस बार सिर तक आ गए। कई खेतों में पौधे औसत सवा पांच या साढ़े पांच फीट लंबे नजर आ रहे है। जो कि आमतौर पर सवा चार फीट तक होते है। लंबाई एक से सवा फीट अधिक होने से समस्या आ गई। डोडे आने के साथ ही पौधे आडे पड़ने लगे। यह देख किसानों की चिंता बढ़ गई। डोडे पर चीरा लगाने एंव दूध लेने में भी कुछ परेशानी आ रही हैं।
मानसून में अधिक बारिश से खेतों मेंं नमी कम नहीं हुई, जड़े पहले जितनी ही पर पौधे लंबे हो गए
अफीम किसान भट्टों का बामनिया निवासी राजू भट्ट, लाखों का खेड़ा निवासी बद्रीलाल जाट ,गौराजी का निम्बाहेड़ा निवासी शंभु जाट ,रण्डियारडी के भैरूलाल जाट आदि इस नई समस्या का कारण इस बार बरसात अधिक होने को मान रहे हैं। बुवाई के समय तो मिटटी में अधिक नमी थी ही, बाद में भी लंबे समय तक नमी बनी रही। इससे पौधों की बढ़वार औसत से अधिक हो गई। जबकि जड़े उस मुकाबले गहराई तक नहीं गई। डंठल यानी तना तो पतला ही रह गया।जो डोडे आने के साथ ही भार नहीं झेल पाया और पौधे आडे पड़ने लगे।
लंबे होने वाले अफीम के पौधे इस बार सिर तक आ गए। कई खेतों में पौधे औसत सवा पांच या साढ़े पांच फीट लंबे नजर आ रहे है। जो कि आमतौर पर सवा चार फीट तक होते है। लंबाई एक से सवा फीट अधिक होने से समस्या आ गई। डोडे आने के साथ ही पौधे आडे पड़ने लगे। यह देख किसानों की चिंता बढ़ गई। डोडे पर चीरा लगाने एंव दूध लेने में भी कुछ परेशानी आ रही हैं।
अफीम पौधों की लंबाई अधिक रहने का कारण नमी रहना भी है। किसान अधिक उपज लेने के लिए ज्यादा खाद व रसायनों का उपयोग करते हैं। इस कारण भी बढ़वार अधिक हो जाती हैं। बीज की वैरायटी एंव मात्रा का भी असर होता हैं।
-प्रशांत जालोटिया, सहायक कृषि अधिकारी कपासन।
फैक्ट फाइल
{खंड प्रथम- पट्टे 5207
हैक्टेयर 431.75 हैक्टेयर
तहसील चित्तौड़गढ़ भदेसर मावली
{खंड द्वितीय -पटटे 4584
हैक्टेयर 375.09 हैक्टेयर
कपासन राशमी गंगरार डूंगला भूपालसागर मावली
{खंड तृतीय पट्टे 5645
हैक्टेयर 390.03 हैक्टेयर
निम्बाहेड़ा बड़ीसादड़ी
{बचाव के लिए यह किया: फसल बचने के लिए अधिकतर किसान फसल में रस्सियों को लकड़ी के खूंटों का जुगाड़ लगा रहे हैं। खेत की हर क्यारी में एक सिरे से दूसरे सिरे तक खूंटे लगाकर रस्सी बांधी गई। ताकि गिरते पौधों को सहारा मिले। बेरिकेड्स की तरह लोहे के पाइप या पतले पोल भी बांधे गए। इस बचाव में लगभग 20 हजार रुपए का अतिरिक्त खर्च आ रहा हैं। रस्सी या डोरियों की मांग बढ़ने से बाजार में इनकी रेट तक बढ़ गई।