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बालाण की ढाणी धाणकान में आजादी के 71 साल बाद पहुंची बिजली रोशनी के बीच ग्रामीणों ने एक दिन पहले ही खेली होली, मिठाई बांटी

राजगढ़ तहसील के गांव बालाण की ढाणी धाणकान के ग्रामीणों के लिए आजादी के 71 साल बाद पहली बार होली खास तोहफा लेकर आई है।...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:40 AM IST
राजगढ़ तहसील के गांव बालाण की ढाणी धाणकान के ग्रामीणों के लिए आजादी के 71 साल बाद पहली बार होली खास तोहफा लेकर आई है। ये तोहफा है बिजली। गांव में आजादी के बाद पहली बार बुधवार को बिजली पहुंची। जैसे बिजली की रोशनी आई, ग्रामीण खुशी से उछल पड़े। इस खुशी में ग्रामीणों ने एक दिन पहले ही होली खेल ली। गांव के करीब 72 घरों में बिजली की रोशनी देख ग्रामीणों की आंखें भी रोशनी की तरह खुशी से चमक उठी। गांव की आबादी करीब 550 है।

गुगलवा ग्राम पंचायत के अधीन आने वाला यह गांव हरियाणा सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है। गांव पूरी तरह से कृषि पर आधारित है। सभी एक ही समाज के लोग हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत गांव में बिजली पहुंची है। रात को गांव में जश्न मनाया गया। गांव में बिजली लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भाजपा के जिला उपाध्यक्ष सीताराम लुगरिया का घोड़ी पर बैठाकर जुलूस निकाला गया। सभी ने एक-दूसरे को बधाई देते हुए इस साल की होली पर्व पर गांव को इतनी बड़ी खुशी मिलने पर एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली भी खेली। महिलाओं ने मंगल गीत तक गाए। इस दौरान मुकेश इंदौरा, सुखवीर इंदौरा, कमल बागड़ी, रिंकू, रामनिवास राजपूत, कृष्ण कुमार मलिक, रामकुमार जिंदवारिया, लक्खूसिह महावीरसिंह, हरिसिंह चौधरी, सुमेरसिंह इंदौरा मौजूद थे।

राजगढ़ तहसील क्षेत्र में हरियाणा बॉर्डर पर प्रदेश का आखिरी गांव है बालाण की ढाणी

इनके लिए होली की खुशी हुई दोगुनी

....क्योंकि गांव में आजादी के बाद पहली बार बिजली पहुंची है। आज तक ये पढ़ाई के लिए पड़ोस के दूसरे गांव में जाते थे, या फिर चार्जिंग लाइट या लैंप से ही पढ़ाई करते थे।

गांव की बेटी चूरू में पार्षद बनी तब पहली बार ग्रामीणों ने उठाई थी बिजली की मांग

गांव के सभी 72 घरों में बिजली कनेक्शन, 550 आबादी को होगा फायदा

चूरू के वार्ड 32 के पार्षद सीताराम लुगरिया का गांव बालाण की ढाणी धाणकान में ससुराल है। 1994 में उनकी प|ी कलावती लुगरिया पार्षद का चुनाव जीती। जीत की खुशी में दोनों गांव पहुंचे। तब कलावती के पीहर वालों ने उससे गांव में बिजली लाने की मांग रखी। उसी दिन से कलावती व सीताराम बिजली के लिए जंग लड़ रहे थे। तब ग्रामीणों ने बताया था कि एक ये ही गांव है, जिसमें बिजली नहीं है। आस-पास तक के गांवों में बिजली है, हमारा गांव आज तक बिजली से वंचित है। उसी दिन तय कर लिया कि किसी ने किसी तरह गांव में बिजली लानी होगी। सालों तक जिला परिषद, सतर्कता समिति, जनसुनवाई में बार-बार मुद्दे उठाने सहित ऑनलाइन शिकायत आदि की प्रक्रियाएं जारी रखी। 20 दिसंबर 2017 को मुद्दा उठाने के बाद महसूस हुआ था, कि अब ससुराल में जरूर बिजली आएगी। बाद में डिस्कॉम से संपर्क में रहा और इसी का परिणाम रहा कि आज गांव में बिजली आ गई। 24 साल के संघर्ष की जीत इतने बड़े होली पर्व से दो दिन पहले मिलने पर दिल को काफी सुकून मिला।

अमृत और चंचल वेला में आज शाम 7:40 से 8:50 बजे तक होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त

चूरू | फाल्गुनी शुक्ल पूर्णिका पर गुरुवार को अमृत व चंचल वेला में होलिका दहन किया जाएगा। धुलंडी शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन 16 दिवसीय गणगौर पूजा शुरू होगी। बुधवार को बाजार में त्योहारी उत्साह दिखा। पंडित ताराचंद दाधीच के अनुसार गोधुली वेला में गुरुवार को शाम अमृत व चंचल वेला में होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। उन्होंने बताया गुरुवार शाम 7.40 के बाद 8.01 तक अमृत वेला तथा रात 8.50 तक चंचल वेला में दहन श्रेष्ठ रहेगा। जेल बड़कुलों की माला पिरोने का शुभ मुहूर्त सुबह भद्रा लगने से पहले 9.02 बजे तक रहेगा इसके बाद भद्रा शुरू हो जायेगी। ज्योतिष के मुताबिक भद्रा में होलिका दहन अहितप्रद व प्रजा को कष्टकारक रहता है। होली भी एक यज्ञ समान अनुष्ठान है जिसमें नई फसल को दहन के समय समर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इससे प्रकृति अनुकूल बनती है। इसी दिन होली बुराई के रूप में ढूंढा राक्षसी को जलाकर भक्त प्रहलाद की रक्षार्थ उसे श्राप देकर अग्नि में जलाकर विजय पर्व मनाया जाता है। खुशी में उड़ाया गया पक्का रंग आंखों या त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके हानिकारक रसायन खुजली, दाद, फोड़ों का कारण बन सकते हैं।

चूरू के वार्ड 32 के पार्षद सीताराम ससुराल में बिजली लाने के लिए 1994 से कर रहे थे संघर्ष

लुगरिया का घोड़ी पर बैठाकर स्वागत करते ग्रामीण।

दो महीने पहले अनुसूचित जाति आयोग के सामने उठा था मुद्दा : 20 दिसंबर 2017 को अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष विकेश खाेलिया चूरू में जनसुनवाई के लिए पंहुचे थे। इस दौरान लुगरिया ने ये मुद्दा उठाया था। बैठक में जोधपुर डिस्कॉम के एसई के टीए ने ये कहा दिया था कि यह ढाणी बिजली से जुड़ चुकी है, जबकि मीटिंग में मौजूद अन्य लोगों ने कहा था कि ढाणी अभी नहीं जुड़ी है। इस बात से खफा खोलिया ने तुरंत एईएन से बात की तो पता लगा ढाणी वंचित है। इसके बाद गांव में बिजली लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।