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घायल हिरण तड़पता रहा पर मदद को नहीं आए कर्मचारी

आज भास्कर ये खबर इसलिए लिख रहा है, क्योंकि वन्य जीवों से जुड़ा वन विभाग अपनी जिम्मेदारी से बिलकुल दूर है। इस बात की...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 04:20 AM IST
आज भास्कर ये खबर इसलिए लिख रहा है, क्योंकि वन्य जीवों से जुड़ा वन विभाग अपनी जिम्मेदारी से बिलकुल दूर है। इस बात की पुष्टि भी रविवार को हुई,जब राष्ट्रीय मोर व हिरण तक के घायल हो जाने की सूचना के बाद विभाग की टीम ने किसी तरह की गंभीरता नहीं दिखाई।

हैरानी की बात तो ये है कि जब इन्हें फोन किया तो अवकाश का बहाना और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। थक-हार कर लोगों ने पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड़ व पुलिस की मदद से घायल जीवों को वन विभाग तक पहुंचाया, पर हैरत की बात ये है कि घायल हिरण को वन विभाग के रेक्सयू केंद्र पर पहुंचाने के बाद भी करीब आधा घंटा तक इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा। प्रस्तुत है वन विभाग की उदासीनता झकझोर देने वाली रिपोर्ट।

मंत्री को फोन करना पड़ा, 4 घंटे बाद पहुंची टीम : निकटवर्ती ढाढ़र गांव में रविवार सुबह 6 बजे राष्ट्रीय मोर को कुछ आवारा कुत्तों ने घायल कर दिया। गांव के गिरधारी कस्वा ने बताया कि उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों को फोन किया, मगर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। सरपंच व कलेक्टर को सूचना दी तो कोई सुनवाई नहीं हुई। युवकों ने मंत्री राठौड़ को फोन किया। मंत्री ने कलेक्टर को फोन किया।

रेस्क्यू टीम, सदर थाना पुलिस लेकर आई. : जिला मुख्यायल से दो किमी दूर रामसरा रोड पर रविवार सुबह 11.30 बजे इमरान चौहान नामक युवक को एक हिरण घायल मिला। उसने इसकी सूचना सबसे पहले भास्कर को दी। वन विभाग के कर्मचारी ने कहा कि आज अवकाश है। इसके बाद बार-बार कहने पर जो फोन नंबर दिए, वे गलत निकले। फिर एक दूसरे नंबर दिए। वन विभाग के डीएफओ सूरतसिंह पूनिया ने बताया कि घायल हिरण, मोर के संबंध में किसी ने उन्हें सूचना दी। कर्मचारियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिए, मुझे फोन करना चाहिए। कलेक्टर साहब से सूचना मिलते ही घायल मोर को लाने टीम भेज दी। हिरण के बारे में उन्हें सूचना देरी से मिले। पुलिस से उनकी बात हो गई। हिरण-मोर की मदद को लोग आगे आ रहे है।

चूरू. घायल हिरण को पुलिस को सौंपते युवक।