भागवत कथा का समापन, कथावाचक ने मित्रता में भेदभाव नहीं करने का दिया संदेश

Churu News - मावलियों के मोहल्ले में स्थित जीण माता मंदिर के वार्षिकोत्सव पर मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा का समापन हुआ। कथा...

Dec 04, 2019, 11:55 AM IST
Ratangarh News - rajasthan news bhagwat katha concludes storyteller gives message not to discriminate in friendship
मावलियों के मोहल्ले में स्थित जीण माता मंदिर के वार्षिकोत्सव पर मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा का समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन कथावाचक पंडित पंकज आत्रेय ने कहा कि मित्रता में हमें भेदभाव नहीं करना चाहिए। उन्होंने सुदामा प्रसंग पर प्रकाश डाला। मुख्य यजमान सत्यनारायण बालण ने व्यासपीठ की पूजा की। इस मौके पर मंदिर समिति संरक्षक संतोषकुमार इंदौरिया, मनोजकुमार जोशी, प्रहलाद घोड़ेला, सांवरमल निराणिया, करणीसिंह आदि मौजूद थे।

जीवन में हर समय करते रहें भगवान का स्मरण

राजलदेसर | एनएच 11 पर राजाणा जोहड़ के पास स्थित संत खेतानाथ महाराज की बगीची में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक पंडित किशोरचंद्र शास्त्री रामायणी ने कहा कि मानव देह चौरासी लाख योनियों के बाद प्राप्त होता है। हमें इसे प्राप्त करके प्रभु का प्रत्येक क्षण स्मरण करते रहना चाहिए। जन्म लेने का लाभ यही है कि अंत में नारायण की स्मृति बनी रहे। यह लाभ जीवन में अभ्यास से होता है। हमें मृत्यु को याद करते रहना चाहिए। जब तक हम अपने खान, पान व व्यवहार पर ध्यान नही देंगे, तब तक ह्रदय शुद्ध नहीं होगा। महाराज ने कहा कि व्यक्ति का जीवन सरल होना चाहिए। धन्य वह नहीं जिसके पास धन दौलत अधिक हो। धन्य तो वह है जो निर्धन होते हुए भी भगवान का चिन्तन व भक्ति करें। सुदामा निर्धन जरूर थे, लेकिन उनके साथ गोविंद का नाम हर समय था। सलिल महाराज ने भजन की प्रस्तुति दी। महंत नंदानाथ, संत सुरजीतनाथ, डूंगरनाथ, भीकमचंद सुथार, भवानी मंत्री, उपसरपंच महावीरसिंह आदि ने भागवत का पूजन किया।

रतनगढ़. कथा के प्रारंभ में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।

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