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- Rajaldesar News Rajasthan News For The First Time 492 Years After The Temple Establishment 18 Tirthankaras Including Moolnayak Adinath Were Anointed With Saffron
मंदिर स्थापना के 492 साल बाद पहली बार मूलनायक आदिनाथ सहित 18 तीर्थंकरों का केसर से अभिषेक हुआ
मुख्य बाजार में 16वीं शताब्दी में निर्मित मूलनायक आदिनाथ जैन मंदिर में 1598 में मूर्तियां की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद गुरुवार को पहली बार जैन मंदिर ट्रस्ट के सहयोग से धार्मिक आयोजन हुआ। समाजसेवी व भामाशाह बाबूलाल दुधोड़िया के सहयोग से हुए कार्यक्रम के तहत सुबह 7 से 10 बजे तक मुंबई के आचार्य नीरज गुरु की ओर से मंत्रोचार के साथ गर्भगृह में मूलनायक आदिनाथ दादा व चंद्रप्रभु की उत्कृष्ट श्रेणी के श्वेत संगमरमर पाषण की तथा नेमीनाथ की काली पाषणमय कलापूर्ण प्रतिमाओं सहित 18 तीर्थंकरों की मूर्तियों का केसर से अभिषेक करवाया गया।
विधिकार मयूर जैन के सानिध्य में बाबूलाल दुधोड़िया सहित श्रद्धालुओं ने मुख्य सभा गृह के बांई ओर शासनदेवी प्रतिमा व दाहिनी ओर युग प्रधान आचार्य जिदत्तसुरि की चरण पादुका तथा चौक में बांई ओर भैरव प्रतिमा का पूजन कर सुख, समृद्धि की कामना की। पुजारी पूनमचंद पांडे ने बताया कि 492 वर्ष पूर्व निर्मित मंदिर में प्रतिष्ठित अति प्राचीन प्रतिमाएं इस बात की द्योतक है कि राजलदेसर जैन तपस्वियों का अतिप्रिय केंद्र रहा है।
शासनदेवी को फलेचुंदड़ी ओढ़ाई, ध्वज यात्रा निकाली
सुबह 11 बजे मंदिर से ध्वजा यात्रा निकाली गई। यात्रा में सर्वसमाज के लोगों ने भाग लिया। ध्वजा यात्रा करीब एक बजे वापस मंदिर पहुंची। दोपहर 1.09 बजे आदिनाथ दादा की ध्वजा स्थापना करवाई गई तथा शासनदेवी को फलेचुंदड़ी ओढ़ाई गई।
अभिषेक करते श्रद्धालु।