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घरवाले व ग्रामीण कहते रहे जीवन खतरे में पड़ जाएगा लेकिन रुकमानंद ने किडनी देकर पत्नी की जान बचाई

एक वर्ष पहले
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चूरू में बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में सहायक लेखाधिकारी सहजूसर निवासी रुकमानंद शर्मा ने अपनी प|ी का जीवन बचाने के लिए दो साल पहले किडनी दान दी थी। अब दोनों स्वस्थ हैं। 2017 में जुलाई-अगस्त में प|ी पुष्पा देवी की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें जयपुर में चैकअप कराया तो पता चला कि उनकी दोनों किडनी डैमेज हो गई हैं। पुष्पादेवी के जीवन को बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता बचा। फिजिशियन डॉ. कमल कस्वा व सर्जन हरीश कस्वां से बात की तो उन्होंने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट की जा सकती है। इससे कोई खतरा नहीं है। रुकमानंद ने किडनी देने का निश्चय कर लिया। इस बात का पता परिजनों व ग्रामीणों को लगा तो उन्होंने रुकमानंद काे समझाया कि किडनी ट्रांसप्लांट से उसका जीवन भी खतरे में पड़ सकता है, लेकिन उन्होंने 26 फरवरी 2018 को प|ी पुष्पा देवी (47) का जीवन बचाने के लिए बांयी किडनी डोनेट कर दी। अब दोनों स्वस्थ हैं। रुकमानंद के चार बेटे हैं।

51 वर्षीय रुकमानंद प|ी को किडनी डोनेट करने के बाद एक माह अधीक्षण अभियंता कार्यालय नहीं आए। कुछ आराम करने के बाद वे नियमित ऑफिस जाने लगे। अब वे बाइक से गांव सहजूसर से चूरू आवागमन करते हैं। उन्हें कोई तकलीफ नहीं है। उधर, उनकी प|ी पुष्पादेवी भी घर का रोजमर्रा काम करती हैं। किडनी ट्रांसप्लांट में करीब 7 लाख रुपए खर्च हुए, जिनमें से आधे डिस्कॉम ने वहन किए। डिस्कॉम के अधिकारियों ने उनको मोटिवेट किया।

रुकमानंद व पुष्पादेवी।
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