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चूरू कलेक्ट्रेट में राज्य की पहली ऐसी कैंटीन, जहां खाना बनाने से लेकर परोसने तक सारा काम संभालती हैं महिलाएं

एक वर्ष पहले
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चूरू कलेक्ट्रेट में संचालित राज्य की पहली ऐसी कैंटीन है, जिसका सारा प्रबंध ग्रामीण महिलाएं ही संभालती है। रोचक बात ये है कि ये सभी महिलाएं साक्षर से लेकर आठवीं तक ही पढ़ी हुई हैं। करीब छह महीने पहले कलेक्टर संदेश नायक की पहल पर करीब पांच साल से बंद पड़ी कैंटीन को शुरू करने का जिम्मा राजीविका से जुड़े भैरूसर के जय श्रीराम स्वयं सहायता समूह की महिला अध्यक्ष ने उठाया। समूह की अध्यक्ष सरोज शर्मा ने प्रति माह दो हजार रुपए के किराए पर ली गई इस कैंटीन को 10 महिलाओं को साथ में लेकर शुरू किया। फिलहाल कैंटीन से 25 महिलाओं को रोजगार मिला हुआ है। चाय-कॉफी सहित नाश्ता, भोजन आदि का सारा काम महिलाएं करती हैं। सर्व भी महिलाएं करती हैं। कलेक्ट्रेट के विभागों मेंे महिलाएं ही चाय-कॉफी देकर आती हैं, वहीं मांग के अनुसार टिफिन भी बनाकर भेजा जाता है। कैंटीन में भी भोजन की व्यवस्था कर रखी है। इसके साथ ही राजीविका से जुड़े एक अन्य महिला समूह की महिलाएं कैंटीन में संचालित दुकान पर विभिन्न महिला समूहों द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट बेचने का काम करती हैं।

राजीविका डीपीएम बजरंग सैनी ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कलेक्टर संदेश नायक ने ये पहल की। समूह की महिलाओं की मेहनत के चलते छह महीने में कैंटीन में लोगों की चहल-पहल बढ़ गई। इसके जरिए 25 महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हुई है।

रतनगढ़ में महिलाएं चला रहीं फैक्ट्री-ढाबा, जैविक खेती भी कर रहीं

सामान्य शिक्षा प्राप्त रतनगढ़ की ग्रामीण महिलाएं भी अपनी मेहनत के दम पर तहसील क्षेत्र की करीब सात-आठ हजार महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवा रही हैं। रतनगढ़ की ग्रामीण महिलाएं फैक्ट्री व ढाबा चला रही हैं। साथ ही जैविक खेती भी कर रह रही हैं। फिलहाल राजीविका के रतनगढ़ ब्लॉक से जुड़े 900 समूह की 10840 महिलाएं विभिन्न कामों के जरिए न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही है, बल्कि 7 से 8 हजार महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा रही हैं।

राजीविका जैविक खेती : 3000 जुड़ी हुई हैं

रतनगढ़ के पंचायत समिति परिसर में राजीविका के स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जैविक खेती कर रही है। 26 दिसंबर, 2019 को जैविक खेती करना शुरू किया। फिलहाल इससे तीन हजार महिलाएं जुड़ी हुई हैं। लोगों को बिना केमिकल की सब्जी उपलब्ध कराई जाती है।

राजपूताना ढाबा : 12 महिलाएं करती हैं काम

अोम बन्ना स्वयं सहायता समूह की तरफ से रतनगढ़ के गांव पायली के पास राजपूताना ढाबा संचालित किया जा रहा है। समूह की अध्यक्ष सदाकंवर ने बताया कि यहां पर 12 महिलाएं काम कर रही हैं। यहां पर प्रतिदिन दो से तीन हजार रुपए की कमाई की जा रही है। इसके जरिए 12 महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं। पिछले महीने कलेक्टर संदेश नायक ने इस ढाबे का अवलोकन कर सराहना की थी।

दो साल पहले रतनगढ़ में राजीविका के 400 स्वयं सहायता समूह संचालित थे, जिसमें 3700 महिलाएं कार्यरत थी। फिलहाल समूहों की संख्या 900 हो गई। इनसे 10840 ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं। इन महिलाओं ने तहसील की 7 से 8 हजार महिलाओं को रोजगार देकर आर्थिक ताकत दिखाई है। -शिवानी भटनागर, बीपीएम, राजीविका, रतनगढ़

कलेक्ट्रेट की कैंटीन करीब पांच साल से बंद थी। इससे पहले चलाने वाली की सर्विस भी सही नहीं थी। विवाद के कारण इसको बंद कर दिया गया। इस कैंटीन को चलाना चुनौती था। राजीविका के महिला समूह ने इसको स्वीकारा। वहीं लोगों में एक धारणा है कि ज्यादातर देखने को मिलता है कि महिलाओं का केवल नाम रहता है, जबकि काम उसका पति, ससुर, देवर या पुत्र यानि पुरुष करते हैं। बात चाहे जनप्रतिनिधि की हो या किसी प्रकार के राशन डिपो, शराब ठेके आदि की। ग्रामीण महिलाएं जनप्रतिनिधि बनती है या किसी महिला के नाम से राशन डिपो, शराब ठेका आदि खुलता है, लेकिन वहां पर काम उसके परिवार के पुरुष वर्ग ही संभालते हैं। कलेक्ट्रेट में कैंटीन चलाने वाली महिलाओं ने अपने काम और मेहनत के बलबूते पर इस धारणा को बदल दिया है।

गर्मी में छाछ, राबड़ी और जूस भी मिलेगा

समूह की अध्यक्ष सरोज सैनी ने बताया कि गर्मी के मौसम में कैंटीन मंे छाछ के साथ राबड़ी व जूस की भी उपलब्धता रहेगी। छाछ और राबड़ी ग्रामीण परिवेश के हिसाब से ही बनाई जाएगी। राबड़ी में भी जीरा राबड़ी, हिंग राबड़ी, प्याज राबड़ी सहित कई तरह की वैरायटी तैयार की जाएगी।

राजीविका महिला गृह उद्योग

कलेक्ट्रेट में कैंटीन में पकाेड़े बनाती महिला।

राजीविका से जुड़े भैरूसर गांव के समूह ने 6 माह पहले 10 महिलाओं को साथ लेकर शुरू की कैंटीन, अब 25 महिलाओं को मिल रहा रोजगार

फैक्ट्री में चप्पल बनाती महिला।

रतनगढ़ तहसील मुख्यालय पर 27 मार्च, 2019 को राजीविका महिला गृह उद्योग की स्थापना की गई। 30 स्वयं सहायता समूह की 320 महिलाएं उद्योग की शेयर होल्डर हैं। 120 महिलाएं चप्पल फैक्ट्री, 100 महिलाएं मसाले व 100 महिलाएं दाल बनाने का काम कर रही हैं। उत्पादों को ऑन लाइन मार्केट भी उपलब्ध करवाया गया है। माया, मनोहरी, संतोष, दतार कंवर, सरोज कंवर, सुमन कंवर मोहनकंवर, भंवरी, भगवती, कमला, अर्चना व पूजा इस कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स हैं।

कलेक्ट्रेट में संचालित कैंटीन में चाय बनाती महिला।
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