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पंच परमेष्ठी विधान से सिद्धों की आराधना भगवान के 1008 नामों का उच्चारण किया

एक वर्ष पहले
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दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान अाराधना महोत्सव के छठे दिन रविवार को गणिनी आर्यिका 105 विभाश्री माताजी के सानिध्य में हो रहे विधान में पंच परमेष्ठी विधान के माध्यम से सिद्धों की आराधना की गई। विधान का शुभारंभ श्रीजिनसहस्त्रनाम आराधना द्वारा भगवान के 1008 नामों का उच्चारण किया गया। भगवान जिनेंद्र के मस्तक अभिषेक व शांतिधारा की गई। साथ ही 512 अर्घ समर्पित किए गए।

बाद में छोटे-छोटे बच्चों ने धार्मिक नृत्य प्रस्तुत किया गया। गणिनी माताजी के चरणों का प्रक्षालन महिला मंडल सुजानगढ़ की ओर से किया गया। नागौर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माताजी को शास्त्र भेंट किया गया। संयोजक सुरेन्द्र बगड़ा ने बताया कि इस अवसर पर गुवाहाटी, जयपुर, सीकर, नागौर, लाडनूं, सीकर से आए भक्तों ने आकर माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। दिगंबर जैन समाज ने अतिथियों का स्वागत किया गया। विधानाचार्य स्वतंत्र जैन के निर्देशन में भगवान जिनेन्द्र की प्रथम शांतिधारा व संध्याकालीन महाआरती करने का सौभाग्य मोहनलाल, गजराज, संतोष, जयप्रकाश, संजय सडूवाला परिवार को प्राप्त हुआ। द्वितीय शांतिधारा माणकचन्द छाबड़ा परिवार ने की। पादपक्षालन महिला मंडल सुजानगढ़ व शास्त्र भेंट भागचंद बगड़ा, प्रकाशचन्द, चैनरूप गंगवाल, पारसमल कुसुमदेवी बगड़ा, पारसमल पवनकुमार सोगानी व मोहनलाल सडूवाला परिवार ने किया। इस दौरान अध्यक्ष विमल पाटनी, मंत्री पारसमल बगड़ा, खेमचंद बगड़ा, संतोष बगड़ा, सुनील बगड़ा, संजय बगड़ा, विनीत बगड़ा, डाॅ. सरोज कुमार छाबड़ा, प्रेमलता बगड़ा, नूतन बगड़ा, मीनू बगड़ा, मैना देवी पाटनी, प्रीति बगड़ा, महक पाटनी, लालचन्द बगड़ा, जयकुमार बगड़ा, मुकेश बगड़ा व महावीर पाटनी सहित काफी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित थे।

विभाश्री माताजी ने धर्मसभा में कहा कि इस संसार में तीन शक्तियां प्राप्त होती है मन बल, वचन बल, काय बल। वचन शक्ति का हमारे जीवन में बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। यदि हमारे द्वारा बोला गया एक शब्द कानों में अमृत घोलता है, तो एक शब्द पूरे शरीर में विष की तरह जहर घोलने का काम कर सकता है। व्यक्ति के व्यक्तित्व का, उसकी जीवन शैली, उसके वचनों के व्यवहार से प्रदर्शित होती है। वचन एक शक्ति है जिसका सदुपयोग हम मीठा बोलकर कर सकते हैं।

दिगंबर जैन मंदिर में भगवान जिनेंद्र की शांतिधारा पूजा करते श्रद्धालु।
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