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पारित अविश्वास प्रस्ताव खारिज, 15 दिन में सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं तो राजकुमार ही होंगे सभापति

गत 3 जनवरी को नगर परिषद के सभापति राजकुमार जायसवाल के खिलाफ पारित हुए अविश्वास प्रस्ताव को हाई कोर्ट ने गुरुवार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 02:55 AM IST

पारित अविश्वास प्रस्ताव खारिज, 15 दिन में सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं तो राजकुमार ही होंगे सभापति
गत 3 जनवरी को नगर परिषद के सभापति राजकुमार जायसवाल के खिलाफ पारित हुए अविश्वास प्रस्ताव को हाई कोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट के न्यायाधिपति एम.एन. भंडारी एवं न्यायाधिपति दिनेश सोमानी की बेंच ने यह माना कि अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया नियमों के अनुसार नहीं अपनाई गई। इसमें सांसद व विधायक का वोट नहीं डलवाया गया। इस संबंध में राजकुमार जायसवाल की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया गया है। इस पर अपील के लिए राज्य सरकार के एजी को हाई कोर्ट ने 15 दिवस का समय भी दिया है। ऐसे में यह आदेश 15 दिन बाद लागू हो सकेगा। अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के फैसले की जानकारी मिलते ही जायसवाल के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। पटाखे चलाकर खुशी का इजहार किया तथा मिठाई बांटी।

कार्यवाही पर सवाल : हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा- प्रस्ताव पारित करते समय सांसद व विधायक के वोट क्यों नहीं डलवाए इसलिए पारित प्रस्ताव को खारिज किया जाता है

राजकुमार जायसवाल

यह सच्चाई की जीत : सभापति का पद खो बैठे राजकुमार जायसवाल ने हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह सत्य व जनता की जीत है।

राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी :

शहर में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। भाजपा की अंदरूनी लड़ाई के चलते पारित हुए अविश्वास में भूमिका निभाने वाले नेताओं को भी करारा झटका लगा है।

जनता का सवाल : क्या सरकार भाजपा के जायसवाल के खिलाफ अपील करेगी

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार को 15 दिन के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी होगी। यदि भाजपा की सरकार अपनी पार्टी के जायसवाल के खिलाफ अपील नहीं कर सकी, तो सभापति की कुर्सी राजकुमार जायसवाल को ही मिलेगी। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने में अपनाई प्रक्रिया के खिलाफ राजकुमार जायसवाल द्वारा की गई याचिका की सुनवाई के दौरान सभापति मुरली मनोहर शर्मा ने भी कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाकर उन्हें पक्षकार बनाने का आग्रह किया था, लेकिन हाई कोर्ट ने प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।

इस चुनौती से जीते : सांसद-विधायक को वोटिंग में शामिल क्यों नहीं किया

जायसवाल के अधिवक्ता आरबी माथुर ने बताया कि याचिका में प्रार्थी के खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव और चेयरमैन व वाइस चेयरमैन अविश्वास प्रस्ताव नियम -2017 के नियम 2 (b) को चुनौती दी गई। याचिका में कहा कि नए नियमों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव में केवल नप के निर्वाचित सदस्यों को ही शामिल किया गया है। जबकि 2007 के नियमों में एमएलए व एमपी को एक्स ऑफिसियो मैंबर्स माना है। अविश्वास प्रस्ताव में एमएलए व एमपी की गैर मौजूदगी में मतदान हुआ है जो गलत है।

अविश्वास से बने सभापति बोले : सभापति मुरली मनोहर शर्मा का कहना है कि कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने के बाद ही कुछ कह सकेंगे। इस मामले में वे पक्षकार भी नहीं थे। ऐसा हुआ सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देंगे।

जानिए : कब-कब क्या हुआ

15 दिसंबर को अविश्वास पेश :नगर परिषद में भाजपा के सभापति राजकुमार जायसवाल के खिलाफ उनकी ही पार्टी के पार्षदों ने कांग्रेस व निर्दलीय मेंबरों ने मिलकर 15 दिसंबर को अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था।

3 जनवरी को मतदान :इस दिन अविश्वास के पक्ष में 30 पार्षदों ने मतदान किया था। इनमें भाजपा के 9, कांग्रेस के 14 व निर्दलीय 7 पार्षदों ने अविश्वास के पक्ष में मतदान किया था।

नए सभापति :अविश्वास के बाद कांग्रेस के मुरली मनोहर को सभापति चुना गया।

सियासी गणित :40 सदस्यीय परिषद में भाजपा के 12, कांग्रेस के 17 व निर्दलीय 11 पार्षद हैं।

रिकॉल :20 अगस्त 2015 को हुए सभापति के चुनाव में भाजपा के राजकुमार एवं कांग्रेस के मुरली मनोहर को 20-20 मत मिले थे। गोली डालकर किए फैसले में जायसवाल विजयी रहे थे।

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