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भास्कर ने जिला अस्पताल पर पांच दिन तक रखी नजर, रोज डेढ़ घंटे देरी से आए डॉक्टर, कराहते रहे गंभीर मरीज

एक वर्ष पहले
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जिला अस्पताल के आउटडोर की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। दैनिक भास्कर ने 4 से 8 मार्च तक ओपीडी की विस्तृत निगरानी की तो रोजाना मरीजों को डॉक्‍टरों के इंतजार में बेहाल पाया। पांच दिन तक कोई भी डाॅक्टर समय पर नहीं आया। कई डाॅक्टर तो डेढ़ घंटे तक देरी से आए। एेसे में कई मरीज इंतजार कर लौट गए। अस्पताल का निर्धारित समय सुबह 9 बजे का है, लेकिन डॉक्‍टरों की सीट 1 घंटे तक रोज खाली दिखाई दी। कई बार चार्ट में दिनांक व डॉक्टरों की उपस्थिति सही नहीं दर्शाई गई। इससे मरीज भ्रमित होकर आउटडोर में चक्कर लगाते दिखाई दिए। कोरोना वायरस के खौफ के बाद भी अस्पताल की व्यवस्था में कोई परिवर्तन या चुस्ती नहीं आई है। हालांकि प्रशासन ने चिकित्साकर्मियों की छुट्टियों पर रोक लगाई है, लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों का रवैया पुराने जैसा है। आउटडोर में डॉक्टरों की इंतजार में बैठे सुभाष शर्मा ने बताया कि उसके पैर में फ्रैक्चर है, लेकिन आउटडोर में एक घंटे से कोई डॉक्टर नहीं है।

आउटडोर में डॉक्टरों का आगमन

4 मार्च : 10 बजे बाद

5 मार्च : 10 बजे बाद

6 मार्च : 10:30 बजे बाद

7 मार्च : 10 बजे बाद

8 मार्च : दो को छोड़कर सभी 10 बजे बाद

ट्रॉलीमैन नजर ही नहीं आते

अस्पताल प्रशासन ने ट्रॉलीमैन लगा रखे हैं, लेकिन कई बार मरीजों को परिजन ही ट्रॉली में लेकर आते हैं। बुधवार को मूलचंद शर्मा को परिजन जिला अस्पताल में दिखाने लाए। इमरजेंसी में दिखाने के बाद उसे संबंधित डॉक्टर के पास भेज दिया गया। मूलचंद को परिजन ही ट्रॉली से ओपीडी में लाए। जबकि हर वार्ड में ट्रॉलीमैन है।

पीएमओ डॉ. सी. एल. मीणा से सवाल-जवाब


आउटडोर में रोजाना ही डॉक्टर देरी से क्यों पहुंचते हैं।

डॉक्टरों को आउटडोर में समय पर बैठने के लिए पाबंद कर रखा है।

डॉक्टर एकसाथ वार्ड में राउंड पर क्यों जाते हैं।

डॉक्टरों का वार्ड में एक-एक घंटे राउंड करने का समय निर्धारित है।

आउटडोर में डॉक्टर के देरी से आने से मरीजों को बहुत लंबा इंतजार करना पड़ता है।

आउटडोर में डॉक्टर समय पर नहीं बैठने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

हड्डी रोग विभाग में तो मरीज इंतजार ही करते नजर आते हैं।

दो डॉक्टर ट्रेनिंग पर गए हैं। अब दो ही बचे हैं।

डॉक्टरों की सफाई- पहले भर्ती रोगियों की करते हैंै जांच

डॉ. आर. के. मीणा का कहना है कि वार्ड में भर्ती मरीजों को पहले देखना पड़ता है। जिससे उनका समय पर उपचार चालू हो सके। भर्ती मरीजों को देखने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। डॉ. डी. एन. शर्मा का कहना है कि सुबह 9 से 10 बजे तक वार्ड में राउंड पर रहते हैं। आईसीयू में भी मरीज देखते हैं। इसके बाद आउटडोर में बैठते हैं।

रविवार को मात्र दो घंटे का आउटडोर था, लेकिन 10 बजे तक भी दो ही डॉक्टर सीट पर थे। फिजिशियन सीट पर नहीं होने से मरीज बेहाल रहे। दौसा निवासी अतुल खंडेलवाल ने बताया कि 10 बज गए, लेकिन आउटडोर में एक भी डॉक्टर नहीं आए। हड्डी रोग विभाग में एक ही डॉक्टर सीट पर मिले। आउटडोर का समय पूरा होने के कारण कई मरीज बिना दिखाए ही लौट गए।


8 मार्च : रविवार को दो घंटे आउट डोर के बाद भी 10 बजे तक सीटें खाली

दौसा| जिला अस्पताल के आउट डोर में मरीजों की भीड़। पर्ची 9 बजे से बनती है, पर डॉक्टर कब आएगा कोई नहीं जानता।

4 मार्च : मरीज करते रहे इंतजार

सुबह 10 बजे तक कोई डॉक्टर सीट पर नहीं आया। डॉ. डी. एन. शर्मा, डॉ. आर. डी. मीणा व डॉ. आर. के. मीणा, डॉ. के. सी. शर्मा आदि सीट पर नहीं मिले। डॉ. आर. डी. मीणा व डॉ. आर. के. मीणा सुबह 10:30 बजे बाद सीट पर आए। फिजिशियन का वार्ड में राउंड का समय निर्धारित कर रखा है, लेकिन डॉक्टर निर्धारित समय में राउंड भी नहीं करते। हड्डी रोग विभाग में सुबह 10 बजे तीन में से एक भी डॉक्टर सीट पर नहीं मिला।

7 मार्च : कुर्सी को ताकते रहे मरीज

आउटडोर में सुबह 10 बजे तक एक ही डॉक्टर सीट पर मिला। डॉक्टरों के सीट पर नहीं मिलने पर लोगों ने नाराजगी जताई। दौसा निवासी तुलसी देवी सुबह 9 बजे आउटडोर में पहुंच गई, लेकिन करीब 10 बजे तक डॉक्टर नहीं आने से बेहाल रही। आलूदा निवासी सत्यनारायण सिंह ने बताया कि वह मां को दिखाने आया है। डॉक्टर आउटडोर में देरी से आते हैं। बाद में ढंग से नहीं देख पाते। जनरल सर्जन के नहीं आने पर कक्ष में मरीजों की भीड़ रही।

6 मार्च : एक बजते ही चल दिए

आउटडोर में सुबह 10:30 बजे तक एक भी डॉक्टर नहीं आया, लेकिन दोपहर में एक बजते ही मरीजों को लाइन में छोड़कर घर के लिए रवाना हो गए। ऐसे में कई मरीज डॉक्टर को दिखाए बिना ही लौट गए। संपती देवी का कहना है कि चार घंटे इंतजार के बाद डॉक्टर वापस लौट गया, लेकिन उसका नंबर नहीं आया। अब शाम को फिर से आना पड़ेगा। इसी तरह गजेंद्र ने बताया कि फ्रेक्चर का एक्स-रे दिखाने आया है, लेकिन डॉक्टर नहीं मिला।

5 मार्च : पीएमओ के पास पहुंचे रोगी

आउटडोर में दस बजे तक अधिकांश डॉक्टर सीट पर नहीं अाए। हड्डी रोग विभाग में 11 बजे तक एक भी डॉक्टर सीट पर नहीं था। बाद में कई मरीज पीएमओ के कक्ष में पहुंचे तथा पीएमओ को दिखाया। मेडिसिन में भी दस बजे तक अधिकांश डॉक्टर सीट पर नहीं थे। वहीं मरीज भटक रहे थे। दौसा निवासी रामबाबू शर्मा का कहना है कि उसके जुकाम, खांसी होने के कारण दिखाने आया है। 10 बज गए, लेकिन एक भी डॉक्टर सीट पर नहीं है।

अस्पताल में 56 डॉक्टर, 5 डॉक्टर ट्रेनिंग में, 51 की ड्यूटी अोपीडी में, इनमें से तीन की इमरजेंसी में ड्यूटी

दौसा| आउट डोर में रविवार को डाॅक्टर का इंतजार करते मरीज।
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