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देश की चिंता नारी को, पुरुष पीछे

एक वर्ष पहले
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जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रम व प्रोत्साहन योजनाओं के बावजूद परिवार नियोजन के मामले में महिलाएं ही आगे रही हैं। पिछले पांच साल के आंकड़ों पर गौर करें तो सामने आया कि जिले में 34827 महिलाओं ने नसबंदी कराई, वहीं पुरुषों का आंकड़ा महज 79 रहा। एेसे में सामने आ रहा है कि परिवार नियोजन के मामले में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की भागीदारी न के बराबर है। गौरतलब है कि परिवार नियोजन को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक साल नसबंदी का लक्ष्य तय कर उसके आधार पर शिविर लगाए जाते हैं। इसके तहत जिले में वर्ष 2015-16 में विभाग ने 10 हजार 321 नसबंदी का लक्ष्य रखा गया था। इसमें 8 हजार 305 नसबंदी की। इसी प्रकार वर्ष 2016-17 में लक्ष्य 10 हजार 828 के मुकाबले 7 हजार 661, वर्ष 2017-18 में 8 हजार 457 के लक्ष्य के मुकाबले 6 हजार 705, वर्ष 2018-19 में 7 हजार 476 के लक्ष्य के मुकाबले 7 हजार 44 एवं वर्ष 2019-2020 में जनवरी माह तक 7 हजार 620 के लक्ष्य के मुकाबले 5 हजार 191 महिला एवं पुरुषों की नसबंदी की जा चुकी है।

पिछले साल जिला नसबंदी में चतुर्थ
स्थान पर था


डिप्टी सीएमएचओ (परिवार कल्याण) डॉ. सुभाष बिलोनिया का कहना है कि पिछले वर्ष दौसा जिला नसबंदी में चतुर्थ स्थान एवं पीपीआईयूसीडी में राज्य में प्रथम स्थान पर रहा था। परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत अधिक से अधिक नसबंदी का लक्ष्य अर्जित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके लिए जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर परिवार कल्याण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।

पांच साल में पुरुष
नसबंदी की स्थिति


वर्ष नसबंदी महिलाएं पुरुष

2015-16 8305 8296 9

2016-17 7661 7642 19

2017-18 6705 6685 20

2018-19 7044 7027 17

2019-20 5191 5177 14

(जनवरी तक)

शाबाश }34827 महिलाओं ने नसबंदी कराई, पुरुषों में आंकड़ा 79 ही

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