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पावटा में पहले खेली डोलची होली फिर देवर भाभी की कोड़ामार होली
उपखंड क्षेत्र के गांव पावटा में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी बुधवार को पारंपरिक डोलची होली उत्साह एवं भाईचारे के साथ खेली गई। पावटा गांव में होली के बाद दूज को डोलची होली खेलने की परंपरा वर्षों से अनवरत चली आ रही है, इसके पीछे यहां के लोगों अपने पूर्वज बल्लू शहीद की याद में होली खेलने की मान्यता रखते हैं।
डोलची होली को देखने के लिए दूरदराज से लोगों का सुबह से ही पावटा गांव में पहुंचना शुरू हो गया। शाम को करीब साढ़े तीन बजे हदीरा के मैदान में पावटा गांव के युवा होली खेलने के लिए इकट्ठा हो गए, दर्शक भी हजारों की संख्या में मैदान के चारों तरफ जम गए, यहां तक कि आसपास की छतों पर भी दर्शकों का जमावड़ा लग गया। खेल शुरू हुआ और मानो दो सेनाएं आपस में भिड़ गई। नंगे बदन युवा जोश के साथ एक दूसरे की पीठ पर चमड़े की बनी डोलची से पानी की बौछार करने लगे। देखते ही देखते युवा युवाओं की पीठ लहूलुहान हो गई, लेकिन युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ और दुगने जोश के साथ डोलची खेलने लगे करीब एक घंटे चले इस खेल को गांव के बुजुर्गों ने आकर विराम दिलवाया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार डोलची गांव के ही बल्लू शहीद की याद हदीरा के मैदान में वर्षों से अनवरत रूप से खेली जाती है, इसमें एक चमड़े का पात्र होता है,जो आगे से सकरा होता है। दनगस एवं पीलवाड़ गोत्र के युवा इस चमड़े के पात्र जिसे डोलची कहा जाता है, से पानी भरकर एक दूसरे की पीठ पर पानी की बौछार करते हैं। डोलची होली के बाद देवर भाभी की कोड़ामार होली खेली गई, इसके बाद गांव के मुख्य मार्गों से होकर ढोला मारू की सवारी निकाली गई। अतिथियों के लिए घर घर मे पकवान बनाये गए। होली को देखने के लिए आसपास के जिलों से हजारों की संख्या में दर्शक इकट्ठा होते हैं।
कार्यक्रम में पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह, जनक सिंह, हरदेव पावटा, टीकम सिंह, मुंशी खांवदा रतन सिंह सहित बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। इस
मौके पर पुलिस की भी माकूल व्यवस्था रही।
महवा ग्रामीण| पावटा में ऐतिहासिक डोलची होली खेलते लोग।