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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने रात को फुटपाथों पर विश्राम करने वालों को रैन बसेरे में दिलाया दाखिला

Dausa News - जिले में कड़ाके की ठंड को देखते हुए फुटपाथ व सड़कों पर बेसहारा एवं बेघर जीवनयापन कर रहने वाले व रात्रि विश्राम कर...

Jan 16, 2020, 08:00 AM IST
Dausa News - rajasthan news the district legal services authority got the people resting on the pavements at night to get admission in the night shelters
जिले में कड़ाके की ठंड को देखते हुए फुटपाथ व सड़कों पर बेसहारा एवं बेघर जीवनयापन कर रहने वाले व रात्रि विश्राम कर रहे व्यक्तियों को तत्काल प्रभाव से रैन बसेरों में प्रवेश दिलाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रेखा वधवा ने बताया गया कि कड़ाके की ठंड को देखते हुए कलेक्टर, एसपी तथा नगर परिषद के आयुक्त को पत्र जारी कर टीम बनाकर सर्दी में फुटपाथ व सड़कों पर रात्रि विश्राम करने वाले व्यक्तियों को रैन बसेरों में दाखिल कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में दौसा कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी तथा पैरालीगल वॉलेंटियर्स की टीम बनाकर ड्यूटी लगाई गई है। अब तक 36 बेसहारा-बेघर अथवा रात्रि विश्राम कर रहे व्यक्तियों को रैन बसेरे में निशुल्क प्रवेश दिलाया गया है। सचिव रेखा वधवा ने आमजन से भी अपील की है कि यदि कोई वृद्ध व्यक्ति अथवा महिला सर्दी में फुटपाथ व सड़कों पर रात्रि विश्राम करते हुए पाया जाते हैं, तो उन्हें तत्काल गांधी सर्किल तथा नगर परिषद परिसर में स्थित रैन बसेरे में निशुल्क प्रवेश दिलाएं तथा रैन बसेरों में निशुल्क प्रवेश दिलाने में यदि कोई परेशानी हो तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी एवं पैरालीगल वॉलेन्टियर्स से रेलवे स्टेशन के आस-पास सम्पर्क करें।

एनएसयूआई ने लापरवाह चिकित्सकों को बर्खास्त करने की मांग की

दौसा| जिला अस्पताल में लापरवाह व घूसखोर चिकित्सकों को बर्खास्त करने के लिए एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा को ज्ञापन सौंपा।

एनएसयूआई प्रदेश महासचिव हरिमोहन आजाद के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने चिकित्सा मंत्री को ज्ञापन देकर कहा कि अस्पताल में मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र में चिकित्सकों, कर्मचारियों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दी हैं। पैसे देने पर ही प्रसूताओं व नवजातों की देखभाल की जाती है।

पैसे नहीं देने पर उनको भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। बिना जांच किए ही प्रसूताओं के परिजनों को गंभीर केस का झूठा डर दिखाकर मोटी रकम वसूली जाती है। हाल ही में 6 जनवरी को एक नवजात की मौत हो गई थी। इस संबंध में एनएसयूआई ने सभी मामलों की जानकारी चिकित्सा मंत्री को दी है एवं दोषी चिकित्सकों को बर्खास्त करने की मांग की है।

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