70 प्रतिशत तक पानी बचाने के लिए बागवानी की ओर बढ़ा किसानों का रुझान

Dausa News - लगातार बरसात की कमी से जैसे-जैसे जलस्तर गहराता जा रहा है, वैसे-वैसे किसानों को खेती करने के लिए पानी की कमी खल रही...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 10:15 AM IST
Sikrai News - rajasthan news treasures of farmers growing towards horticulture to save water up to 70 percent
लगातार बरसात की कमी से जैसे-जैसे जलस्तर गहराता जा रहा है, वैसे-वैसे किसानों को खेती करने के लिए पानी की कमी खल रही है। ज्यादातर किसान लाखों रुपए खर्च कर एक हजार फीट तक गहरे बोरवैल खुदवाने के बावजूद भी पानी नहीं मिलने के कारण हताश हो रहे हैं। लेकिन कुछ किसानों ने पानी बचाने के लिए गेहूं, सरसों की फसलों से मुंह मोड़कर कृषि एवं उद्यान विभाग के मार्गदर्शन से फलदार पौधे लगाना शुरू कर दिया है। जिसमें 60 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इसके लिए विभाग से किसानों को पौधों एवं ड्रिप सिस्टम के लिए 50 प्रतिशत अनुदान भी मिल रहा है।

कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र होने के कारण तहसील क्षेत्र के अधिकांश लोग खेती पर ही निर्भर हैं। लेकिन लगातार बारिश की कमी के कारण क्षेत्र का प्रमुख माधोसागर व घूमणा बांध पिछले दो दशक से खाली पड़े हुए हैं। जिससे यहां धीरे-धीरे जलस्तर गहराकर 250 से अधिक पहुंच गया है। जलस्तर गहराने से किसानों को गहरे बोरवैल खुदवाने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में अधिकांश किसानों ने पानी के अभाव में रबी की फसल बुआई करना छोड़ दिया है। फसल के अभाव में खाली भूमि को फिर से हरा-भरा बनाने के लिए 10 फीसदी किसानों का फलदार पौधे लगाने की ओर रुझान कर रहे हैं, जो किसानों के लिए फायदेमंद भी हो रहा है। इससे किसानों को पौधों की सिंचाई में न सिर्फ 60 से 70 फीसदी पानी की बचत हो रही है, वहीं पौधों से तीन साल बाद मिलने वाले फलों से फसलों की बजाय अधिक मुनाफा भी मिल रहा है।

पौधों के लिए विभाग से मिल रहा 50% अनुदान

कृषि एवं उद्यान विभाग किसानों को फलदार बगीचे की स्थापना करने के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान दे रहा है। साथ ही पौधों की सिंचाई के लिए बूंद-बंद सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम में किसानों को 50 से 70 प्रतिशत तक अनुदान देकर पानी की कमी से खाली रहने वाली भूमि पर बगीचे स्थापित करने के लिए जागरुक कर रहा है। साथ ही विभागीय अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में स्थापित बगीचों का भ्रमण कर किसानों को उचित मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

सिकराय में अनार व नींबू के 250 हेक्टेयर में बगीचे

लगातार पानी की कमी के चलते किसानों ने फलदार बगीचे तैयार करना शुरू कर दिया है। तहसील क्षेत्र में 250 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर किसानों ने नींबू, अनार, आंवला, बेर के बगीचे तैयार कर रखे हैं। जिनसे किसानों को गेहूं, सरसों व बाजरे की फसलों से अधिक मुनाफा भी मिल रहा है। पीलोड़ी गांव में अनार का बगीचा तैयार करने वाले किसान धांधू राम मीना ने बताया कि वर्ष 2009 में राष्ट्रीय कृषि विभाग योजना में एक हजार अनार के पौधे लगाए थे। जिनसे प्रतिवर्ष 12 से 15 लाख रुपए की आय मिल रही है।

किसानों को दोहरा फायदा

किसानों को अपनी भूमि पर बगीचा स्थापना के बाद दोहरा फायदा भी मिल रहा है। पौधे लगाने के बाद बीच में रहने वाली खाली जगह पर सब्जी, हरा चारा एवं पपीता लगाकर दोहरा फायदा उठा रहे हैं।

ऑनलाइन करना होता है किसानों को आवेदन

किसानों को भूमि पर बगीचा स्थापित करने के लिए ई-मित्र के माध्यम से कृषि एवं उद्यान विभाग की बेवसाइट जमाबंदी, आधार कार्ड, भामाशाह कार्ड, बैंक पास बुक, सिंचाई प्रमाण पत्र, लघु सीमांत प्रमाण पत्र के साथ पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है।

कम लागत व कम मेहनत, पानी, मुनाफा अधिक

सहायक कृषि अधिकारी अशोक मीना का कहना है कि जलस्तर गहराने के कारण अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे हैं, खाली भूमि रेगिस्तान ना दिखे इसके लिए किसानों को विभाग द्वारा फलदार बगीचे स्थापित कर ड्रिप सिस्टम से 70 प्रतिशत तक पानी बचाने के लिए जागरुक किया जा रहा है। बगीचा स्थापित करने के बाद किसान 20 से 25 साल तक कम लागत, कम पानी एवं कम मेहनत में अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। फिलहाल 250 हेक्टेयर में किसानों ने बगीचे तैयार कर रखे हैं, लेकिन प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर कम से कम दो किसानों द्वारा बगीचे स्थापित करवाने का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है।

सिकराय| किसान द्वारा तैयार अनार का बगीचा।

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