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2012 में टेंडर, 2015 में करना था पूरा यह मामला

2012 में टेंडर, 2015 में करना था पूरा यह मामला पहले तो जोधपुर व जयपुर हाईकोर्ट के बीच अटका रहा। बाद में मामला जयपुर...

Danik Bhaskar | May 14, 2018, 04:05 AM IST
2012 में टेंडर, 2015 में करना था पूरा यह मामला पहले तो जोधपुर व जयपुर हाईकोर्ट के बीच अटका रहा। बाद में मामला जयपुर हाईकोर्ट की डबल बैंच में सुनवाई के लिए रखा गया। यहां नहरी परियोजनाओं के अभियंताओं ने सरकार का पक्ष रखा। अभियंताओं ने बताया कि मेड़ता व डेगाना विधानसभा के 176 गांवों में नहरी परियोजना के प्रथम चरण में ही पानी पहुंचाना था। वर्ष 2012 में खोला गया पेट्रोन इंडिया का टेंडर 2015 तक पूर्ण होना था मगर इस बीच पेट्रोन इंडिया काम बीच में छोड़कर चली गई। जिसके बाद री-टेंडरिंग का कार्य किया गया। अब जल्द से जल्द वंचित गांवों में नहरी पानी पहुंचाना है। रिट लगाने वाली दोनों फर्मो के बीच व्यवसायिक प्रतिस्पर्द्धा है, इसलिए ये लोग टेंडर को गलत ठहरा रहे हैं। जबकि नियमानुसार री-टेंडरिंग सही दरों पर की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद टेंडर को सही करार दिया तथा सरकारी फैसले पर मुहर लगा दी। न्यायालय ने कहा इस री-टेंडरिंग के खिलाफ रिट लगाकर मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया ने सरकार व अदालत का वक्त जाया किया और इससे नहरी परियोजना लेट हुई। इसलिए फर्म मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया से 1 लाख रुपए का जुर्माना वसूलने के आदेश दिए।