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मंडावर पंचायत में बंद हुए शराब के ठेके दो साल के संघर्ष में मिली थी लोगों को जीत

देवगढ़ | प्रदेश की तीसरी और जिले की दूसरी शराब ठेकों से मुक्त पंचायत मंडावर में रविवार को नए वित्तीय वर्ष से शराब की...

Danik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:25 AM IST
देवगढ़ | प्रदेश की तीसरी और जिले की दूसरी शराब ठेकों से मुक्त पंचायत मंडावर में रविवार को नए वित्तीय वर्ष से शराब की सरकारी दुकानें बंद हो गई। अब यहां आबकारी विभाग ठेकों पर शराब की बिक्री नहीं कर पाएगा। उल्लेखनीय है 20 जनवरी को मतदान हुआ, इसमें 91 प्रतिशत लोगों ने शराबबंदी के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने दो साल के लिए शराब ठेके तय किए थे। इस प्रक्रिया के अनुसार अभी एक साल ही हुआ है, एक साल का ठेका बाकी है। लेकिन मंडावर सरपंच प्यारी रावत ने सरकार से इसी सत्र से शराब के ठेके बंद करवाने की मांग की थी। इसके तहत कलेक्टर पीसी बेरवाल ने सरपंच प्यारी रावत को पत्र लिख कर मंडावर को शराब का ठेका मुक्त गांव घोषित करने के साथ अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिखा था। ग्रामीणों ने एक सूचना पत्र से गांव में शराब की बिक्री नहीं होने का हवाला देते हुए शराब का परिवहन करना, हथकढ़ शराब बनाना, सामाजिक समारोह में शराब का प्रचलन रोकने, शराब पीकर घूमना तथा शराब लाना ले जाना प्रतिबंधित बताते हुए कानूनी तथा सामाजिक अपराध के श्रेणी में मानकर अपील की है। ग्रामीणों ने शराब के प्रचलन पर रोक लगाने के लिए पुलिस विभाग में आबकारी विभाग की सहयोग की अपील भी की है तथा इस शराबमुक्त गांव को अभियान को सफल बनाने में सहयोग देने वालों को पुरस्कृत करने की घोषणा की है। मंडावर में शराबबंदी को लेकर वर्ष 2016 में महाशिवरात्रि पर सरपंच प्यारी रावत के साथ युवा मंडल के पदाधिकारियों मीठू सिंह, लुम्ब सिंह, प्रेम सिंह, भंवर सिंह, जसवंत सिंह ने शराबबंदी को लेकर संकल्प पत्र भरवाए गए और गांव को शराब मुक्त बनाने का सपना देखा। गांव में कई लोगों ने संकल्प पत्र भरकर शराबबंदी के लिए एकजुटता दिखाने का प्रयास किया पर आबकारी एक्ट के अनुरूप वर्ष 2017 में 15 मार्च को सरपंच प्यारी रावत के नेतृत्व में तत्कालीन कलेक्टर अर्चना सिंह को ज्ञापन देकर शराबबंदी की मांग की थी। प्रशासन ने 25 अप्रैल 2017 को भौतिक सत्यापन कराया। इसमें मंडावर को एकतरफा सफलता मिली। मंडावर गांव को शराब मुक्त बनाने का सपना साकार करने में 91 फीसदी लोगों ने एकतरफा मतदान करते हुए 20 जनवरी को राजस्थान के इतिहास में रिकॉर्ड दर्ज करा दिया।

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