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ग्रांडिल मोहल्ले में रियासतकाल से ही रखी जा रही है सबसे बड़ी होली

Dholpur News - ज्योति लवानिया | धौलपुर होली के रंग अनेक हैं। हर जिले मेंे अलग अलग परंपराएं हैं। लेकिन आज भी ग्रांडिल मोहल्ले...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 05:30 AM IST
ग्रांडिल मोहल्ले में रियासतकाल से ही रखी जा रही है सबसे बड़ी होली
ज्योति लवानिया | धौलपुर

होली के रंग अनेक हैं। हर जिले मेंे अलग अलग परंपराएं हैं। लेकिन आज भी ग्रांडिल मोहल्ले के लाेग रियासत कालीन होली की परंपरा को निभाते हुए हर बार चले आ रहे हैं। रियासत कालीन राजा महाराजा इसी मोहल्ला में होली देखने आते थे। इस मोहल्ले में सबसे बडी होली रखी जाती थी, जिसे आज भी कालीमाई मंदिर के सामने ग्रांडिल मौहल्ले के लोग शहर भर मेें अपने स्तर पर इस होली को अपने स्तर पर सबसे बड़ी होली रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

मान्यता है कि होलिका दहन के दिन रियासत काल में राजा महाराजाओं की होली यहां से शुरुआत होती थी। शहर भर में एक जगह ग्रांडिल मौहल्ले में सबसे बडी होली रखने की परंपरा आज भी लोग सालों बाद भी निर्वहन कर रहे हैं। वजह है कि घर परिवार के बुजुगों का कहना है कि होली पर्व को लेकर राजा महाराजाओं की परंपरा निभाने से मन को सुकून मिलता है। बड़े बुजुर्ग गोविंद शर्मा, डॉ रविंद्र श्रोतीय कहते हैं कि इस होली की खासियत यह थी कि होलिका दहन के बाद हुरियारे गीत गाते हुए शहर भर में होली खेलने का आमंत्रण देते हुए रातभर होली के गीत गाते हुए निकलते थे, जो आज यह परंपरा शहरभर में न रहकर मात्र कुछेक मोहल्ले तक सीमित रह गई है, लेकिन शहर में सबसे बड़ी होली रियासत काल मेें सबसे बडी रखी जाती थी, जो आज भी सबसे बडी होली ग्रांडिल मोहल्ले में ही जलती है, जिसे देखने के लिए शहर भर के लोग आते हैं।

बड़े बुजुर्ग बोले- विरासत सहेजने से मिलती है पर्व की खुशी, मोहल्ले के लोग नाचते गाते रात में देते हैं शहर में होली खेलने का निमंत्रण

नृसिंह बाग में भरा जाता था होली के रंग का कुंड, खेलते थे महाराज समस्त सरदारी व जनता के साथ होली

पुरानी श्री डयोढी स्थित नृसिंह बाग में राजा महाराजाओं के हथियार रखने का स्थान था। जहां ऊंट, घोड़े, हाथियों के आभूषण व फौज के हथियार रखे जाते थे। इसी जगह में अंडर ग्राउंड एक कुंड बना हुआ था, जहां होली से पहले इस रंगों के पानी से भर दिया जाता था। जहां आमजन सहित समस्त सरदारी के लोग व राजपरिवार के सदस्य इस जगह से रंगों का पानी लेकर होली खेलते थेे।

इस परंपरा का निर्वहन भी बड़े बुजुर्ग कर रहे

रियासत काल में राजा महाराजा राधा बिहारी मंदिर, नृसिंह मंदिर, श्री रामचंद्र जी मंदिर, गंगा मंदिर में फूलों की होली खेलने धुलंडी के दिन जाते थे। उसी के बाद जनता जर्नादन व राज परिवार के सदस्यों के साथ होली खेला जाया करती थी, जिसे आज भी परंपरा के अनुसार शहर के बडे बुृजुर्ग इन मंदिरों में पहले भगवान के साथ फूलों की होली खेलने के बाद होली खेलने आस पडौस व संग साथियों के यहां जाते हैं।

धौलपुर. रियासतकाली कुंड जहां होली के रंग भरे जाते थे।

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