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आदिनाथ की शोभायात्रा 17 को, महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव 6 अप्रैल को मनेगा
सकल दिगंबर जैन समाज धौलपुर की ओर से 17 मार्च को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव एवं 6 अप्रैल को भगवान महावीर जयंती की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को पुरानी सब्जी मंडी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में समाज के पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष हीरालाल जैन ने की। अध्यक्ष जैन ने बताया कि बैठक में शोभा यात्रा की तैयारियों को लेकर विभिन्न कमेटियों का गठन किया गया।
जिसमें सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि 17 मार्च को सुबह 8 बजे गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो पुरानी सब्जी मंडी स्थित जैन मंदिर से प्रारंभ होकर बजाज खाना, लाल बाजार, सेठ प्रताप सिंह मार्ग ,हलवाई खाना ,राधा बिहारी रोड पैलेस के सामने होती हुई जैन मंदिर पर समापन किया जाएगा। वहीं 6 अप्रैल को जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। जिसमें शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में भगवान महावीर स्वामी के जीवन दर्शन पर आधारित झांकियां, महिला सशक्तिकरण की झांकी, जल है तो कल है , स्वच्छता अभियान , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आदि झांकियां प्रमुख आकर्षक रहेंगी। इस दौरान धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। बैठक में जैन समाज के मंत्री प्रदीप मामा, टीकम चंद जैन पूर्व मंत्री, राजू जैन कोषाध्यक्ष, धर्मेंद्र जैन,अशोक जैन, रामभरोसी लाल जैन, प्रवास जैन, विनय ठाकुर उपाध्यक्ष, सुभाष जैन, अनिल जैन, नितिन जैन, महेश चंद जैन, प्रवक्ता धनेश जैन सहित समाज के पदाधिकारी मौजूद रहे।
तीर्थंकर भगवान चन्द्रप्रभु का मनाया गर्भ कल्याण महोत्सव
डीग। पुरानी डीग स्थित श्री चन्द्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चन्द्रप्रभु का गर्भ कल्याण महोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। उत्सव में सुबह मंदिर में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा कर भगवान के गर्भ कल्याण का अर्द्ध चढाया। जैन समाज के अध्यक्ष सुरेश जैन ने बताया कि जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चन्द्रप्रभु का जन्म पावन नगरी काशी जनपद के चन्द्रपुरी में राजा महासेन एंव रानी सुलक्षणा देवी के घर हुआ। भगवान जब मां के गर्भ में आए थे तब इन्द्र द्वारा नगर को सजाया गया था। 6 माह पूर्व ही र|ों की वर्षा नगर में होने लगी। माता को 16 शुभ सपने दिखने लगे। इससे शुभ संकेत हो गए कि तीर्थंकर का गर्भ में प्रवेश हो चुका है। भगवान का चिन्ह चन्द्रमा है। चन्द्रमा यश-अपयश, लाभ-हानि, उत्थान-पतन का एक प्रतीक है। चन्द्रमा से हमें आभार युक्त बने रहने की शिक्षा मिलती है। यदि शुभ विचारों का जन्म होगा तो जीवन विकसित होता है, और चन्द्रप्रभु की तरह मोक्ष प्राप्त कर भगवान बना जा सकता है। उत्सव में राजेन्द्र भगत, हरी सेठ, भारत भूषण, गोपीचन्द, वंश, योगेश, शुभम, शकुंतला, रेखा, लक्ष्मी, पुष्पा, डोली आदि सहित बडी संख्या में जैन श्रावक मौजूद थे।
धर्म समाज
धौलपुर। बैठक में तैयारियों को लेकर चर्चा करते जैन समाज के पदाधिकारी।