अन्नपूर्णा दूध योजना अव्यावहारिक होने के कारण स्कूलों के लिए बनी परेशानी का कारण

Dholpur News - धौलपुर। पिछली भाजपा सरकार ने बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए सरकारी विद्यालयों में आनन फानन में शुरू की गई...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:10 AM IST
Dholpur News - rajasthan news annapurna milk scheme is impractical due to problems created for schools
धौलपुर। पिछली भाजपा सरकार ने बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए सरकारी विद्यालयों में आनन फानन में शुरू की गई अन्नपूर्णा दुग्ध योजना अव्यावहारिक होने के कारण विद्यालयों में परेशानी का कारण बन रही है। इस योजना के अंतर्गत प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए 100 एमएल दूध एवं उच्च प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए 150 एमएल दूध देने का प्रावधान है। इस योजना के संचालन में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयों को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ने शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को भेजे ज्ञापन में मांग की है कि विद्यालयों में दूध वितरण का कार्य प्रथम दो कालांश में किया जाता है। जबकि यह दोनों प्रथम कालांश महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षण के होते हैं। जिससे विद्यार्थियों के शिक्षण पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उस दर पर शुद्ध दूध विद्यालयों को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। विद्यार्थियों के लिए फीका दूध वितरण करने के सरकार के निर्देशों के चलते ज्यादातर छोटे बच्चे फीका दूध पीने से बचते हैं। दूध को गर्म करने के लिए खर्च होने वाले ईंधन एवं उक्त कार्य को करने वाले व्यक्ति के लिए भी सरकार द्वारा कोई अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जाता है। जिससे इसके संचालन में शिक्षकों को परेशानी आ रही है। प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि ज्ञापन में अन्नपूर्णा दुग्ध योजना के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में प्रतिदिन मौसमी फल अथवा प्रोटीन एवं विटामिन युक्त बिस्किट इत्यादि की व्यवस्था सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए करने की मांग शिक्षा मंत्री से की गई है।

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