तीन ग्रहाें के स्वराशि संयोग के बीच बसंत पंचमी मनेगी

Dholpur News - माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी से बसंत का आगाज होगा। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना के साथ...

Jan 16, 2020, 08:05 AM IST
Dholpur News - rajasthan news basant panchami will be celebrated in the middle of coincidence of three grahas
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी से बसंत का आगाज होगा। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना के साथ ही विवाह के शुभ मुहूर्त भी होगा। ज्योतिषाचार्य पं. राम शास्त्री ने बताया कि इस बार की बसंत पंचमी इसलिए भी श्रेष्ठ है,क्योंकि सालों बाद ग्रह और नक्षत्रों की चाल इस दिन को ओर खास बना रही है। इस बार तीन ग्रहों का स्वराशि योग,मंगल वश्चिक पर गुरू धन में और शनि मकर में रहेंगे। इस दिन विवाह कार्यों के लिए अति शुभ माना गया है।

योग का हा संयोग वैवाहिक जीवन के लिए

उन्होंने बताया कि वैवाहिक जीवन के लिए सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का संयाेग बनेगा। जो परिणय सूत्र में बंधने के लिए यह दिन श्रेष्ठ है। पंचागों में इस बार बसंत पंचम 29 अौर 30 जनवरी को पंचमी तिथि दो दिन रहेगी। बुधवार सुबह 10.46 बजे से शुरू होगी जो गुरूवार दोपहर 1.20 बजे तक रहेगी। दोनों दिन पूर्वाह्न व्यापिनी बनी है। धर्म सिंधु आदि शास्त्राें के अनुसार यदि चतुर्थी तिथि विद्धा पंचमी होने से 29 जनवरी बुधवार को मनाना शास्त्रोक्त रहेगा।

धर्म-समाज
विद्या आरंभ का महापर्व

ज्योतिषाचार्य पं. राम शास्त्री ने बताया कि ये पर्व विद्यारंभ करने का शुभ दिन है। बसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में बसंत पंचमी के मनाया जाता है। इस मौके पर मां सरस्वती और भगवान श्री विष्णु जी की पूजा - अर्चना की जाती है और मौसम में आसानी से उपलब्ध होने वाले फूल चढ़ाए जाते हैं। वहीं विद्यार्थी इस दिन किताब कॉपी और पाठ्य सामग्री की भी पूजा- अर्चना करते हैं। इस दिन शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। इस का कारण यह है कि इस दिन को विद्या आरंभ करने के लिए शुभ माना जाता है।

गुप्त नवरात्र 25 से 3 तक

पं. शास्त्री ने बताया कि इस बार माघ शुक्ल के गुप्त नवरात्र 25 जनवरी से 3 फरवरी तक होंगे। इस दौरान विशेष पूजा अनुष्ठान होंगे। वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और दो बार गुप्त नवरात्र आती है। माघ शुक्ल पक्ष में और आसाढ़ शुक्ल में,इस प्रकार कुल मिलाकर वर्ष में चार नवरात्र होते हैं। गुप्त नवरात्र में विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना,महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इसमें विशेष तरह की इच्छा की पूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है।

अबूझ मुहूर्त पर 9 रेखा सावा

उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहूर्त के तौर पर जाना जाता है। इस बार 29 और 30 जनवरी को नो रेखा भी रहेगा। इस कारण नए कार्यों को शुरूआत के लिए यह दिन उत्तम माना जाता है। इस दिन मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा,घर की नींव,गृह प्रवेश,वाहन खरीदने,व्यापार शुरू करने आदि के लिए शुभ है।

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