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फैसले से पहले कोर्ट ने करा दिया राजीनामा, आपसी सहमति से सुलझा 5 भाइयों में 40 साल से चल रहा संपत्ति बंटवारे का विवाद

Dholpur News - जिले के सबसे पुराने संपत्ति मामले में शुक्रवार को फैसला हो गया। यह फैसला एेसा हुआ कि जिसे सुनकर हर एक के चेहरे...

Feb 15, 2020, 08:20 AM IST
Dholpur News - rajasthan news before the verdict the court made the agreement settled by mutual consent the dispute of sharing property among the 5 brothers for 40 years

जिले के सबसे पुराने संपत्ति मामले में शुक्रवार को फैसला हो गया। यह फैसला एेसा हुआ कि जिसे सुनकर हर एक के चेहरे खुशी से खिल उठे। सबसे बड़ी बात है कि मामला वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में होने के बाद भी न्यायाधीश ने फैसला नहीं दिया। न्यायाधीश महावीर महावर और 4 अधिवक्ताओं के प्रयास से परिवार ने शुक्रवार को खुशी से राजीनामा कर एक अच्छी मिसाल पेश की है। अधिवक्ता दीनदयाल शर्मा ने बताया कि राजाखेड़ा कस्बे में 7 दुकान और मकान की पुश्तैनी संपत्ति के बंटवारे को लेकर माताप्रसाद ने 5 मई 1981 में मामला दर्ज करवाया था, जो पांच भाईयों के बीच में था। जिसमें एक भाई ओमप्रकाश की पूर्व में मौत होने के बाद उसके वारिस इसमें शामिल थे। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहा 40 साल पुराना मामला में सुनवाई पूरी हो चुकी थी केवल निर्णय आना शेष था। इसके बावजूद कोर्ट और अधिवक्ता यह नहीं चाहते थे कि निर्णय होने के बाद परिवार के लोग टूटकर अलग हो जाएं। जिसके बाद न्यायाधीश महावीर महावर और अधिवक्ता अशोक सक्सेना, अमित कमठान, राजेंद्र सिंह राना व दीनदयाल शर्मा ने पूरे परिवार की बैठक करवाई। करीब दो महीने में 20 से 25 हुई बैठकों के बाद परिवार ने शुक्रवार को राजीनामा करने पर सहमति जताई। जिसके बाद कोर्ट ने परिवारों को मिलाते हुए उनके फैसले पर खुशी जताई।

टूटा परिवार फिर एक

अलग-अलग रहते हैं परिवार के सभी सदस्य

जानकारी के अनुसार, राजाखेड़ा कस्बे में चिंरौजीलाल की संपत्ति है। चिंरौजीलाल के ज्योति प्रसाद और रामेश्वर दयाल दो पुत्र थे। चूंकि ज्योति प्रसाद ने शादी नहीं की और उनकी पूर्व में ही मृत्यु हो गई। वहीं रामेश्वर दयाल के पांच पुत्र ओमप्रकाश, कामता, माता प्रसाद, श्रीनारायण और राजेंद्र प्रसाद हैं। इनमें ओमप्रकाश की मृत्यु हो गई और उसके पुत्र संपत्ति में वारिस हैं। परिवार के सभी सदस्य दूर-दूर रहते थे। जिसके कारण इनके बीच मामले को लेकर आपसी बातचीत नहीं हो सकी। लोक अदालत ने परिवार के बीच राजीनामा का प्रयास किया है।

40 साल में कोर्ट में हुई 450 से अधिक पेशियां: जानकारी के अऩुसार 40 साल पुराने मामले में वादी और परिवादियों की करीब 450 से अधिक पेशियां हुई हैं। जिसके बाद मामला अंतिम निर्णय पर लगा हुआ था। जिसके बाद परिवारों के बीच 20 से 25 बैठकें हुई और फिर अंत में राजीनामा ही हुआ।

धौलपुर. कोर्ट के बाहर राजीनामा के बाद खड़ा परिवार।

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