अंधेरे में बीता बचपन, पूनम एएनएम बनी तो 50 एलईडी से गांव किया रोशन

Dholpur News - एक ओर जहां सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चलाकर लोगों को बेटियां पढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहीं हैं वहीं...

Jan 24, 2020, 06:51 AM IST
Badi News - rajasthan news childhood spent in darkness poonam becomes anm illuminates the village with 50 leds
एक ओर जहां सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चलाकर लोगों को बेटियां पढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहीं हैं वहीं बाड़ी उपखंड के छोटे से गांव कोयला में रहने वाले किसान और पूर्व पंचायत समिति सदस्य हाकिम सिंह मीणा की पुत्री पूनम ने इसे साकार करते हुए अपने छोटे से गांव कोयला में एक नई और अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने गांव की गलियों में बिजली के खंबों पर 50 एलईडी लाइट लगवाकर गांव में उजियारा फैलाया है। पूनम के द्वारा किए गए इस काम की जहां ग्रामीण प्रशंसा करते नहीं थक रहे। वर्तमान में बसेड़ी के नादनपुर के सब सेंटर बड़रिया में एएनएम के पद पर कार्यरत पूनम अपने दिल में अपने गांव को आदर्श बनाने की दृढ़ इच्छाशक्ति पाले हुए है।

पूनम ने बताया कि काेयला गांव में जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है वहीं गांव की गलियों में रात में अंधेरा पसरा रहता है। जब लोग इन अंधियारे कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हैं तो वे कई बार ठाेकर खाकर गिर जाते हैं। इससे वे कई बार चोटिल भी हो जाते हैं। पूनम का कहना है कि बचपन से उन्होंने कई लोगों को गिरकर चोटिल होते देखा तो मन ही मन में यह ठान लिया कि जब भी उन्हें जॉब मिलेगी तो उससे मिले पैसे से वे अपने गांव की अंधियारी गलियों को रोशन जरूर कराएंगी। पूनम ने बताया कि उनका चयन 8 जनवरी 2016 को एएनएम के लिए हो गया था। इसके बाद उन्हें जो भी तनख्वाह मिलती थी, वे उसमें से कुछ पैसे बचाकर रखती रहीं। जब उनके पास पर्याप्त मात्रा में रुपए इकट्‌ठे हो गए तो उन्होंने उस पैसे से गांव की गलियों को रोशन करने के लिए बिजली के खंबों पर 50 एलईडी लाइट लगवा दीं। अब जब रात में एलईडी का उजाला फैलता है तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है।

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बाड़ी. अब रात में ऐसे रोशन होता है गांव। -इनपुट अमित जादौन

12 हजार रुपए का खर्च आया 50 एलईडी पर, अब हर गली है रोशन

पूनम ने बताया कि गांव की गलियों को रोशन करने के लिए लगवाई गई एलईडी लाइटों पर 12 हजार रुपए खर्च हुआ। उन्होंने बताया कि वे गांव में केवल एलईडी लगाने से ही संतुष्ट नहीं है। उन्हें अभी गांव के लिए बहुत कुछ करना है। उनका कहना है कि वे अपने गांव को आदर्श गांव बनाना चाहती हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है, इसलिए उन्हें गांव में लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में थोड़ा समय तो लगेगा, लेकिन वे इसके लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

सोच बदलो, गांव बदलो से पूनम को मिली प्रेरणा

पूनम ने बताया कि समाजसेवा की सीख उन्हें अपने पिता हाकिम सिंह मीणा से मिली। वे सोच बदलो गांव बदलो अभियान से भी काफी हद तक प्रभावित हैं। इसी अभियान से प्रभावित होकर उन्होंने अपने गांव को रोशन करने के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि वे भविष्य में भी अपनी हर उपलब्धि पर गांव के लिए कुछ न कुछ बेहतर करती रहेंगी।

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