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होली जरूर खेलें, लेकिन गले लगने के बजाय नमस्ते करें, पानी नहीं केवल गुलाल ही लगाएं
होली मस्ती, उमंग और उल्लास का त्यौहार है। आप उसी मस्ती भरे माहौल में होली जरूर खेंले। इसका रंग फीका न पड़े इसलिए कुछ सावधानी जरूर बरतें। क्योंकि इस बार दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस के संक्रमण और पिछले एक सप्ताह से चल रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से ऐसा करना जरूरी भी है। हमारे यहां हालांकि कोरोना वायरस के पॉजीटिव नहीं मिले हैं। लेकिन, मौसम में नमी को देखते हुए बेहतर स्वास्थ्य के लिए सतर्कता बरतने में कुछ गलत भी नहीं है। हालांकि कोरोना वायरस के प्रकोप से लड़ने और बचने के लिए सरकार ने अस्पतालों में पर्याप्त इंतजाम किए हैं।
होली को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने भी इसके लिए एडवाइजरी जारी की है। सीएमएचओ डा. कप्तान सिंह का कहना है कि कोरोना का प्रभाव कम करने के लिए बचाव ही बेहतर उपाय है। इसलिए छींकते और खांसते समय नाक एवं मुंह ढकें। नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं या सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें। जिस व्यक्ति को खांसी या बुखार के लक्षण हों, उससे दूरी बनाएं। किसी प्रकार की कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें। फिर भी खांसी, जुकाम, फ्लू या कोरोना वायरस के लक्षण महसूस हों तो लापरवाही नहीं बरतें और तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल में दिखाएं। टोल फ्री नंबर +91-11-23978046, स्टेट कंट्रोल रूम नंबर 0141-2225624 पर संपर्क करें। स्क्रीनिंग और संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने वाले सभी संदिग्ध मरीजों के लिए पर्याप्त मास्क उपलब्ध हैं।
ऐसे कर सकते हैं बचाव
>बच्चों को पानी वाली होली से दूर रखें।
>सूखी होली आपको संक्रमण से बचाने में कारगर हो सकती है।
>कोरोना एक हेवी वायरस है, जो ज्यादा दूर तक ट्रेवल नहीं कर पाता है. यह वेट पार्टिकल्स में ही ट्रेवल कर पाता है। ऐसे में अगर आप सूखी होली का विकल्प चुनते हैं तो यह सुरक्षित होगा।
>होली के मौके पर अपने लक्षणों पर नजर रख पाना मुश्किल होता है. क्योंकि इस दौरान यह समझ पाना मुश्किल होता है कि आपको नाक या आंखों से पानी क्यों आ रहा है। हो सकता है कि यह फ्लू के लक्षण हों लेकिन आप इसे नजरंदाज न करें।
बाजार में नहीं मिले तो अपना घर आश्रम में प्रभुजनों के लिए खुद ही बनाना शुरू किए मास्क
इधर, बाजार में एन-95, एन-99 और सामान्य मास्क की भी बढ़ती कालाबाजारी को देखते हुए अपना घर ने लावारिस एवं बेसहारा लोगों की मदद के लिए खुद ही मास्क बनाना शुरू कर दिया है। इसके लिए बी-नारायण गेट स्थित अपनाघर में प्रशिक्षित 18 महिलाएं रोजाना 200-250 मास्क तैयार कर रही हैं। अपनाघर के संचालक डॉ. बी.एम. भारद्वाज बताते हैं कि उन्होंने यहां रह रहे प्रभु जनों और स्टाफ के लिए जब बाजार से मास्क खरीदने चाहे तो 2 रुपए वाला फेस मास्क 25 रुपए में भी उपलब्ध नहीं था।
भरतपुर। अपनाघर हेल्प लाइन के सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र बनते मास्क।
{सवाल: कोरोना वायरस डर है। मैं होली खेलना चाहता हूं। कोई दिक्कत तो नहीं।
-जवाबः बिल्कुल आप होली खेल सकते हैं। बस थोड़ी सावधानियां बरतें बाकी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है।
{सवाल: होली खेलते समय मुझे क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
-जवाबः गले मिलने और हाथ मिलाने बचें। नमस्ते करके काम चलाएं।
{सवाल: जब गले नहीं मिल सकते, हाथ नहीं मिला सकते तो गुलाल कैसे लगाएंगे।
-जवाबः हाथ में गुलाल लेकर माथे पर तिलक और गालों पर गुलाल लगा सकते हैं।
{सवाल: मैं हमेशा पानी की होली खेलता हूं। इस बार भी गीले रंगों से होली खेल सकता हूं।
-जवाबः सूखे गुलाल से तिलक लगाकर या गालों पर मलकर होली खेलें तो बेहतर रहेगा। पानी की होली खेलने से बचें। बदलते मौसम में वायरस तेजी से फैलता है।
{सवाल: मुझे होलिका दहन और होली मिलन जैसे सामाजिक कार्यक्रमों में जाना पड़ता है। वहां क्या सावधानियां बरतें।
-जवाबः इन कार्यक्रमों में जाएं, लेकिन भीड़ में एक-दूसरे से दूरी बनाएं। खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल जरूर लगाएं।
{सवाल: कुछ लोग हाल ही विदेश से लौटे हैं। वे होलिका दहन या होली मिलन समारोह में हों तो मैं क्या सावधानी रखूं।
-जवाबः कोई व्यक्ति पिछले 15 दिनों में कोरोना प्रभावित देश से लौटा है या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया है तो उससे दूरी रखें।
सीधी बात
डॉ मुकेश गुप्ता, मेडिकल कॉलेज विभागाध्यक्ष