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वर्षों से शक्ति प्रदर्शन झेल रहा गेट हो गया जर्जर, हादसे की है आशंका
सैंपऊ से करीब 20 किमी दूर यूपी के गांव सरैंधी में वर्षों से चली आ रही अनोखी प्रथा आज भी होली पर्व पर मनाई जाती है। जिसमें धौलपुर जिले के भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। होली पर्व पर ग्रामीण एकत्रित होकर गांव के बीच स्थित अचलम बाबा दरबार में बने एक गेट के पास एकत्रित होते हैं और यहां पर सैंकड़ों की संख्या में दो गुटों में बंट जाते हैं। इसके बाद दोनों गुट शक्ति प्रदर्शन करके गेट से निकलकर दूसरी ओर जाने का प्रयास करते हैं, जिसे दोनों गुट एक-दूसरे को रोकने के लिए जोर भी लगाते हैं। यह अनोखा खेल तीन बार होता हैंं। जिसमें गुट को विजयी होने के लिए दो बार गेट में से निकलना होता है। बड़ी बात है कि गांव में यह अनोखी प्रथा वर्षों से चली आ रही है। वहीं दरबार के पास बना गेट भी अब समय के अनुसार कमजोर हो रहा है। एेसे में गांव की अनोखी प्रथा से कभी भी किसी हादसे की संभावना बनी रहती है। हालांकि ग्रामीण इसे बाबा का चमत्कार भी कहते हैं कि जिसके कारण अभी तक किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।
सरैंधी गांव में अनोखी प्रतियोगिता के दौरान जहां एक ओर दोनों गुटों की ओर से गेट से निकलने का प्रयास किया जाता है। वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण दोनों गुटों के ऊपर पानी की तेज बौझारें भी डालते हैं। गांव में इस अनोखी जू प्रतियोगिता को देखने के लिए बड़ी संख्या में आसपास के लोग भी जुटते हैं।
ग्रामीणों में किंदवती है कि प्रतियोगिता के दौरान पास में बने कुएं से मामा और भांजे की आवाज सुनाई देती है। किदवंती के अनुसार, धारा उज्जैन नगरी से आए बाबा लाखन सिंह ने करीब 700 वर्ष पूर्व सरैंधी को बसाया था। बाद में वे अचलम बाबा को यहां का जागीरदार नियुक्त कर गए। सिंगाइच के लिए सोम बाबा को नियुक्त किया, जिनके नाम पर सिंगाइच पड़ा। बड़ा गांव होने के कारण गांव में चौबीस थोक मौहल्ले हैं जिन्हे छ: पार्टियों (टीकैत पार्टी, लौहरी पार्टी, बढ़ी पार्टी, थोक हवेली, चौक, तिहाय के नाम) के रूप में भी जाना जाता है। होली को गांव के बीच में जाकर अचलम बाबा के दरबार में एकत्रित हो जाते हैं। बाबा अचलम दरबार के सीधे हाथ की तरफ एक गहरा कुआं था, जिसमें काफी समय पहले मामा-भांजे आपस में लड़ते-लड़ते गिर गए थे। वर्तमान समय में कुएं को ढककर एक चबूतरा बना दिया गया है। दौज वाले दिन शाम को बाबा अचलम के वंशज 55 वर्षीय वीरेन्द्र सिंह गद्दी पर बैठते है जिन्हे राजा के नाम से पुकारा जाता है। दरबार में गांव के नागरिकों के साथ प्रधान आदि भाग लेते है। जिसमें गांव के विकास कार्यों से लेकर प्रत्येक मुद्दे पर विस्तार से अपने-अपने विचार प्रकट कर एक वर्ष की रूपरेखा तैयार की जाती है।
धौलपुर. झू प्रतियोगिता के माध्यम से शक्ति प्रदर्शन कर रहे लोग।