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दसवीं और बारहवीं के होनहार छात्र रविन्द्र सिंह के परिवार में दो साल बाद वापस लौटी खुशियां, आंखों में वापिस आई रोशनी

2 वर्ष पहले
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कोई काम कई बार में पूरा नहीं होने पर अधिकांश लोग हिम्मत हार जाते हैं और यहीं कहते रहते हैं कि यह अब यह काम होना मुमकिन नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है। राजाखेड़ा निवासी होनहार छात्र रविन्द्र सिंह के परिजनों ने नामुमकिन को मुमकिन करके दिखा दिया है। 10वीं और 12वीं के होनहार छात्र रविन्द्र सिंह की आईआईटी की तैयारी के दौरान आंखों में काला मोतियाबिंद हो गया था। जिसका उसे पता भी नहीं चला और उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। जवान बेटे की दोनों आंखों की रोशनी जाने के बाद बीधाराम ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई जिलों में जाकर कई डॉक्टरों से बेटे का इलाज करवाया, लेकिन सभी डॉक्टरों ने काला मोतियाबिंद के बाद आंखों की रोशनी आने से मना कर दिया। करीब दो दर्जन डॉक्टरों को दिखाने के बाद सब जगह से बेटे की आंखों की रोशनी आने से मना होने के बाद भी परिजन नहीं हारे। इसके बाद राजाखेड़ा कस्बे के ही राघवेंद्र सिंह चौहान के कहने पर परिजनों ने दिल्ली एआईएमएस के डॉक्टरों को दिखाया, जहां डॉक्टरों ने दो सफल ऑपरेशन किए और होनहार छात्र की दोनों आंखों की रोशनी वापस ला दी। दो साल बाद बेटे की आंखों की रोशनी वापस आने के बाद परिवार में एक बार फिर खुशियां लौट आई हैं।

धौलपुर. चिकित्सालय में ऑपरेशन के बाद मुस्कराता रविंद्र।

रोशनी जाने के बाद आंखों से निकलते थे आंसू, देखकर परिजन भी रोते थे

राजाखेड़ा निवासी छात्र के पिता बीधाराम ने बताया कि जवान बेटे की रोशनी जाने के बाद उसकी आंखों से आंसू निकला करते थे। बेटे की आंखों में आंसू देख परिवार के सभी सदस्य भी रोते रहते थे। तीन राज्यों के कई डॉक्टरों से इलाज करवाकर लाखों रुपए खर्च हो गए, लेकिन कोई भी बेटे की आंख की रोशनी नहीं ला सका था। पिता ने बताया कि बेटे ने दसवीं में 82 प्रतिशत और बारहवीं में गणित संकाय से 78 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी योग्यता को साबित की है।

दो लोगों की वापस लौटी रोशनी तो राघवेंद्र सिंह चौहान ने दी परिजनों को सलाह

राजाखेड़ा कस्बा निवासी राघवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि उसके मिलने वालों में दो लोगों के साथ ऐसा ही केस हो गया था, जिसमें दोनों की आंखों में काला मोतियाबिंद हुआ और उनकी भी आंखों की रोशनी चली गई थी। जिसके बाद उनकी ठीक हुई तो उन्होंने होनहार छात्र के पिता को भी दिल्ली एआईएमएस में इलाज करवाने की सलाह दी, जिसके बाद परिजनों वहां गए और होनहार छात्र की दोनों आंखों की रोशनी सफल ऑपरेशन के बाद वापस आ गई।

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